इस्लामाबाद। पाकिस्तान की राजनीति के मशहूर चेहरे, क्रिकेट वर्ल्ड कप विजेता और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत ने हाल ही में पूरे देश का ध्यान खींचा है। 73 वर्षीय इमरान खान की दाहिनी आंख में गंभीर समस्या देखी गई है, जिससे उनकी दृष्टि लगभग 15 प्रतिशत ही बची है।
जेल में लगातार मानसिक दबाव, उचित इलाज न मिलना और परिवार से मिलने में पाबंदी ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को और गंभीर बना दिया है। यह मामला पाकिस्तान में विपक्षी नेताओं पर होने वाले दमन और न्यायपालिका के दुरुपयोग को भी उजागर करता है।
CRVO: आंख की नस में ब्लॉकेज
इमरान खान को सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन (CRVO) नाम की गंभीर बीमारी हुई है। यह रेटिना की मुख्य नस में ब्लॉकेज के कारण होती है, जिससे आंख में खून जमा हो जाता है, सूजन आती है और ब्लीडिंग होने लगती है।
लक्षण:
इलाज:
नोट: अगर 24-72 घंटे के भीतर इलाज न हुआ, तो आंख की रोशनी स्थायी रूप से जा सकती है।
अमेरिका के राष्ट्रपति वुडरो विल्सन को भी कार्यकाल के दौरान CRVO जैसी समस्या हुई थी। उस समय तकनीकी नाम नहीं था, लेकिन लक्षण रेटिना ब्लीडिंग और अचानक नजर कम होना CRVO के समान थे।
सुप्रीम कोर्ट की जांच में यह सामने आया है कि अक्टूबर 2025 तक इमरान खान की आंखें पूरी तरह से सही थीं, लेकिन उसके बाद उनकी दाहिनी आंख की रोशनी तेजी से कम होने लगी। पिम्स अस्पताल के विशेषज्ञों ने आंख में खून का थक्का पाया और इलाज तथा इंजेक्शन देने के बावजूद अब केवल 15% रोशनी बची है।
उन्हें निजी डॉक्टर से इलाज कराने की अनुमति नहीं दी गई, साथ ही नियमित ब्लड टेस्ट और दांतों के डॉक्टर के पास भी नहीं ले जाया गया। इसके अलावा जेल प्रशासन ने परिवार और वकीलों से मिलने पर पाबंदी लगा रखी है।
हाल ही में जेल प्रशासन में बदलाव के बाद उन्हें हफ्ते में केवल 30 मिनट अपनी पत्नी से मिलने की अनुमति मिली है, जबकि उनके बेटों से उन्हें अब तक केवल दो बार फोन पर बात करने की इजाजत दी गई है।
इमरान खान के मामले ने दिखाया कि, पाकिस्तान में सैन्य और न्यायपालिका का इस्तेमाल विपक्ष को दबाने के लिए होता है। सत्ता विरोधी नेताओं को भ्रष्टाचार, देशद्रोह और कानूनी हथियारों से निशाना बनाया जाता है। जुल्फिकार भुट्टो, बेनजीर भुट्टो, नवाज शरीफ और मुशर्रफ जैसे नेताओं के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था।
ऐतिहासिक संदर्भ-
|
नेता |
वर्ष |
घटना |
विवरण |
|
जुल्फिकार अली भुट्टो |
1977-1979 |
तख्तापलट, फांसी |
जनरल जिया-उल-हक ने गिरफ्तार कर फांसी दी |
|
बेनजीर भुट्टो |
1980s-2007 |
गिरफ्तारी, निर्वासन, हत्या |
सैन्य शासन में राजनीतिक दबाव, 2007 में हत्या |
|
नवाज शरीफ |
1999, 2017 |
फांसी/निर्वासन, पनामा पेपर्स |
सत्ता संघर्ष, सेना समर्थित सरकार का विरोध |
|
परवेज मुशर्रफ |
2001-2008 |
मौत की सजा, निर्वासन |
विपक्षी नेताओं पर कड़ा नियंत्रण, बाद में सऊदी निर्वासन |
पाकिस्तान में अक्सर विपक्षी नेताओं को भ्रष्टाचार, देशद्रोह और कानूनी हथियारों के जरिए दबाया जाता है।
इमरान खान के खिलाफ वर्तमान में 100 से अधिक मामले चल रहे हैं, और वे अगस्त 2023 से अडियाला जेल में बंद हैं। उन्हें भ्रष्टाचार और तोशाखाना केस में 14 साल की सजा सुनाई गई है। जेल में उनके परिवार और वकीलों से मिलने पर पाबंदी लगी हुई है। उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) का आरोप है कि, मौजूदा सरकार सैन्य समर्थित है और जनमत की चोरी कर सत्ता में आई है।
अक्टूबर 2023 से इमरान खान को अलग-थलग रखा गया है, जिससे वे लगातार मानसिक दबाव और अविश्वास की स्थिति में हैं। इसके अलावा उन्हें अपने परिवार और वकीलों से मिलने की अनुमति भी नहीं दी जा रही है।
जेल में घटनाक्रम की जानकारी के बाद सोशल मीडिया पर वायरल रिपोर्टों ने ध्यान खींचा। विशेषज्ञों का कहना है कि, इमरान खान की स्थिति गंभीर है और अगर फौरन रेटिना विशेषज्ञ का इलाज न हुआ, तो स्थायी अंधापन संभव है।