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वन नेशन-वन इलेक्शन पर पूर्व CJI गवई बोले ;वोटर अधिकार को नुकसान नहीं होगा, संसद के पास खास शक्ति मौजूद

वन नेशन, वन इलेक्शन पर जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) की बैठक के दौरान एक अहम संवैधानिक सवाल उठाया गया। सूत्रों के मुताबिक, चर्चा में यह मुद्दा सामने आया कि संविधान नागरिकों को पांच साल के लिए सरकार चुनने का अधिकार देता है।
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वोटर अधिकार को नुकसान नहीं होगा, संसद के पास खास शक्ति मौजूद

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व CJI जस्टिस बीआर गवई ने गुरुवार को ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (ONOE) को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव कराए जाने से न तो वोटर्स के अधिकार प्रभावित होंगे और न ही देश के संघीय ढांचे पर कोई प्रतिकूल असर पड़ेगा। वन नेशन, वन इलेक्शन पर गठित जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) की बैठक में गवई ने अपनी बाते रखी।

संसद के पास एक साथ चुनाव कराने की शक्ति- गवई

बोलते हुए पूर्व CJI ने स्पष्ट किया कि संसद के पास संविधान के अनुरूप आवश्यक संशोधन करने और चुनावों को एक साथ आयोजित करने की पूरी शक्ति है। उनके मुताबिक, यदि प्रक्रिया संवैधानिक दायरे में रहे तो इसे लागू करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है। इस बीच, समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने के करीब बताई जा रही है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि JPC की रिपोर्ट मार्च के अंत तक पेश की जा सकती है। वन नेशन, वन इलेक्शन को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज बनी हुई है।

गवई- 129वां संशोधन विधेयक 2024 संवैधानिक दायरे में

वन नेशन, वन इलेक्शन पर जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) की बैठक के दौरान एक अहम संवैधानिक सवाल उठाया गया। सूत्रों के मुताबिक, चर्चा में यह मुद्दा सामने आया कि संविधान नागरिकों को पांच साल के लिए सरकार चुनने का अधिकार देता है। ऐसे में यदि कोई सरकार बीच कार्यकाल में बहुमत खो देती है और शेष अवधि के लिए चुनाव नहीं होते, तो क्या इससे मतदाता के अधिकार प्रभावित होंगे।

बताया जा रहा है कि इस पर पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि संसदीय लोकतंत्र में सरकार का अस्तित्व सदन के बहुमत पर निर्भर करता है। यदि सरकार बहुमत खो देती है, तो उसे पद छोड़ना ही होगा। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल सिद्धांत है। सूत्रों के अनुसार, समिति के समक्ष यह भी कहा गया कि संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 पूरी तरह संवैधानिक ढांचे के भीतर है और संसद को आवश्यक संशोधन करने का अधिकार प्राप्त है। इस पर अंतिम निर्णय समिति की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।

4 पूर्व CJI ने ये भी कहा

  • जस्टिस यूयू ललित: प्रस्ताव संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ नहीं है, लेकिन चुनाव आयोग को दी जाने वाली अतिरिक्त शक्तियों पर सावधानी बरतना जरूरी है।

• जस्टिस रंजन गोगोई: विधेयक संवैधानिक रूप से मजबूत प्रतीत होता है, हालांकि कुछ प्रावधानों में और अधिक स्पष्टता की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में व्याख्या को लेकर विवाद न हो।

• जस्टिस जेएस खेहर: मूल संरचना सुरक्षित है, लेकिन यदि चुनाव आयोग को अतिरिक्त अधिकार दिए जाते हैं, तो इस पर व्यापक राष्ट्रीय बहस होनी चाहिए।

• जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़: एक साथ चुनाव कराना सैद्धांतिक रूप से संभव है, किंतु आयोग को मिलने वाली व्यापक शक्तियों की स्पष्ट कानूनी सीमाएं तय करना आवश्यक होगा।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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