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20 करोड़ नहीं मिले, तो थम सकते हैं परिवहन सेवा की 500 बसों के पहिए

लोक परिवहन सेवा कंपनियों ने नगरीय विकास से मांगी बकाया राशि
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20 करोड़ नहीं मिले, तो थम सकते हैं परिवहन सेवा की 500 बसों के पहिए

अशोक गौतम-भोपाल। भोपाल और इंदौर सहित प्रदेश के अन्य शहरों में लोक परिवहन सेवा जारी रखने के लिए करीब 20 करोड़ रुपए चाहिए। राशि नहीं मिलने पर इसे संचालित करने वाली कंपनियां हाथ खींच रही हैं, जिससे 500 से अधिक बसों के पहिए कभी भी थम सकते हैं। इंदौर नगर निगम ने बसों का संचालन जारी रखने के लिए शासन से और दस करोड़ 70 लाख रुपए की डिमांड की है। वहीं भोपाल को 5 करोड़ रुपए की दरकार है।

जबलपुर ने दो करोड़ रुपए की फिर से डिमांड की है। राशि नहीं मिलने से हाल ही में भोपाल में बसों का संचालन प्रभावित भी हुआ था। जानकारी के अनुसार सरकार ने भोपाल नगर निगम को 5.53 करोड़ और जबलपुर नगर निगम को 2.70 करोड़ रुपए एक साल पहले दिए थे। शेष राशि चुनाव के बाद देने कर आश्वासन दिया था। लेकिन बकाया राशि अबतक नहीं दी गई है।

इसलिए आ रही समस्या

सरकार ने शहरी लोक परिवहन को मजबूत करने के लिए भोपाल, इंदौर, जबलपुर सहित शहरों के कुछ मार्गों पर पीपीपी मॉडल (ग्रास मॉडल) पर बसों का संचालन किया। इस मॉडल में ऑपरेटर को प्रत्येक दिन 180 किलोमीटर बस संचालित करना था। उन मार्गों पर भी बसें चलाई जानी थीं, जहां कम यात्री मिलते हैं। बताया गया कि ये रूट बस ऑपरेटरों के लिए घाटे का सौदा है। क्योंकि स्टाप पर ज्यादा देर तक रुकने का प्रावधान नहीं है, जिससे पर्याप्त यात्री नहीं मिल पाते हैं। हालांकि तय हुआ था कि घाटे की अंतर राशि नगरीय निकाय प्रति किलोमीटर के अनुसार ऑपरेटरों को उपलब्ध कराएंगी। भरपाई राशि साल के आखिरी महीने में बस ऑपरेटरों को देना है। निकायों को भोपाल, जबलपुर के लिए एक साल पहले सरकार से राशि मिली थी। अब इंदौर, भोपाल और जबलपुर ने फिर राशि की डिमांड की है। इसके चलते नगरीय प्रशासन विभाग ने शहरी बस संचालन के लिए शासन से 20 करोड़ की डिमांड की है। इसमें सरकार को निर्णय लेना है कि ऑपरेटरों को पैसे देना है या नहीं।

इन मुख्य रूटों में कम यात्री

  • इंदौर: पितृ पर्वत से अपोलो डीबी सिटी, तीन इमली से भूरी टेकरी, लक्ष्मी बाई नगर से मांगलिया।
  • भोपाल: ईदगाह हिल्स-एम्स, पुतलीघर से बंगरसिया, करोंद-बैरागढ़ चिचली,भौंरी-मंडीदीप।

नेट मॉडल में दिक्कतें नहीं

शहर में नेट मॉडल में भी बसें चल रही हैं। इसमें ऑपरेटर को बसें चलाना है। यह उनका अपना निर्णय है कि वह किस रूट पर बस चलाते हैं या नहीं। इन बसों के संचालन के लिए सरकार कोई क्षतिपूर्ति राशि भी नहीं देती है। इसके चलते यह बसें उन रूटों पर चलाई जाती हैं जहां फायदे का सौदा होता है। इसके अलावा ये बसें तभी स्टाप से चलती हैं जब पूरी बस भर जाती है।

मामला विचाराधीन है इस मामले में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। बस संचालकों को गैप की राशि देने का मामला विचाराधीन है। -कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री, नगरीय प्रशासन एवं आवास

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