मानपुर फार्महाउस जुआकांड अब पुलिस विभाग की कार्रवाई से निकलकर सीधे हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। आईएएस अधिकारी के फार्महाउस पर पकड़े गए जुए के मामले में सस्पेंड किए गए थाना प्रभारी लोकेंद्र सिंह हिहोरे ने कोर्ट में याचिका दायर कर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि उन्हें सिर्फ इसलिए निलंबित किया गया क्योंकि उन्होंने एफआईआर में तथ्य बदलने से साफ इनकार कर दिया था।
याचिका में टीआई ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के बाद उन पर लगातार दबाव बनाया गया कि फार्महाउस का नाम और लोकेशन एफआईआर से हटाई जाए, लेकिन उन्होंने नियमों के तहत सही जानकारी दर्ज की। इसी के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई और सस्पेंड कर दिया गया। उन्होंने इसे प्रशासनिक दबाव और शक्तियों के दुरुपयोग का मामला बताया है।
गुरुवार को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी, आईजी ग्रामीण, एसपी ग्रामीण सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को पक्षकार बनाते हुए जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को तय की गई है, जिसे इस पूरे कांड में बड़ा मोड़ माना जा रहा है।
टीआई ने अपनी याचिका में यह भी सवाल उठाया है कि एएसआई रेशम गिरवाल को भी सस्पेंड कर दिया गया, जबकि वे घटना के समय छुट्टी पर थीं और ड्यूटी पर मौजूद ही नहीं थीं। इसे उन्होंने बिना जांच के लिया गया फैसला बताया।
याचिका में यह भी कहा गया है कि जुआ पकड़ने के दौरान उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि फार्महाउस किसी आईएएस अधिकारी का है। जब यह बात सामने आई, तब फोन और मैसेज के जरिए दबाव बनाया गया, लेकिन उन्होंने झुकने से इनकार कर दिया।
गौरतलब है कि 10-11 मार्च की रात मानपुर स्थित फार्महाउस पर पुलिस ने छापा मारकर जुए के बड़े अड्डे का खुलासा किया था। कार्रवाई में 18 जुआरियों को गिरफ्तार कर उनके पास से करीब 13.67 लाख रुपए नकद और कुल 28.67 लाख रुपए का माल जब्त किया गया था। इसके बाद 11 मार्च को एसपी यांगचेन डोलकर भाटिया ने टीआई लोकेंद्र सिंह हिहोरे, एसआई मिथुन ओसारी और एएसआई रेशम गिरवाल को निलंबित कर दिया था। अब यह मामला कोर्ट की चौखट पर पहुंच चुका है, जहां 1 अप्रैल की सुनवाई में कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।