Naresh Bhagoria
1 Feb 2026
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 का केंद्रीय बजट आज पेश कर दिया है। जहां बजट में भारत के लिए कई जरूरी सेक्टर्स में सरकार ने घोषणाएं की तो वहीं पड़ोसी देशों और अन्य सहयोगी देशों को दी जाने वाली विदेशी वित्तीय सहायता का भी ऐलान किया गया है। भूटान से लेकर श्रीलंका, बांग्लादेश और अफ्रीकी देशों तक के लिए सहायता राशि तय की गई है।
हालांकि, इस बजट में एक अहम और चौंकाने वाला बदलाव यह रहा कि ईरान के चाबहार बंदरगाह के लिए सहयोग राशि की पंक्ति को 2026-27 के लिए खाली छोड़ दिया गया है। इससे चाबहार परियोजना में भारत की भविष्य की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
बजट में मंगोलिया के लिए सहायता राशि में सबसे बड़ी उछाल देखने को मिली है, जहां आवंटन में करीब 5 गुना वृद्धि की गई है। वहीं लैटिन अमेरिकी देशों के लिए आवंटन को सीधे दोगुना कर दिया गया है। सरकार इसके जरिए दक्षिण अमेरिका में अपने कूटनीतिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
भूटान को मिलने वाली सहायता राशि में मूल्य के लिहाज से सबसे बड़ी बढ़ोतरी हुई है। इसमें ₹138.56 करोड़ की वृद्धि की गई है, हालांकि प्रतिशत के लिहाज से यह बढ़ोतरी 6.44% है।
अफ्रीकी देशों के लिए ₹225 करोड़ और सेशेल्स के लिए ₹19 करोड़ का आवंटन रखा गया है। इन दोनों में पिछले वर्ष की तुलना में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
प्रतिशत के लिहाज से सबसे बड़ी कटौती बांग्लादेश की सहायता राशि में की गई है। बांग्लादेश को दी जाने वाली मदद को 50% घटा दिया गया है।
मालदीव और म्यांमार- दोनों देशों की सहायता राशि में ₹50-50 करोड़ की कटौती की गई है।
बीते कुछ समय से यह चर्चा भी तेज रही है कि भारत अमेरिका के दबाव में चाबहार बंदरगाह परियोजना से दूरी बना सकता है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। भारत पर पहले ही अमेरिका की ओर से कुल 50% टैरिफ लागू है—जिसमें 25% व्यापार से जुड़े आयात शुल्क और 25% रूस से तेल खरीद को लेकर हैं। इन हालात में कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भारत ने ट्रंप प्रशासन के दबाव में चाबहार बंदरगाह पर नियंत्रण छोड़ दिया है।