Budget 2026 :ऑपरेशन सिंदूर का दिखा असर, रक्षा मंत्रालय को सबसे अधिक 7.85 लाख करोड़ मिले, पिछली बार से 15% ज्यादा

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया, जिसमें रक्षा मंत्रालय को 7.85 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्ड आवंटन दिया गया है। यह सभी मंत्रालयों में सबसे अधिक है। ऑपरेशन सिंदूर (operation sindoor) के बाद पेश हुए इस पहले बजट में सरकार ने रक्षा तैयारियों को मजबूत करने, सेनाओं के आधुनिकीकरण और किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने की क्षमता बढ़ाने पर खास जोर दिया है। रक्षा बजट कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 1.99 प्रतिशत है।
सेनाओं के आधुनिकीकरण पर सबसे बड़ा फोकस
बजट 2026 में सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए 1.85 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में करीब 24 प्रतिशत अधिक है। वायु सेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की प्रस्तावित खरीद को देखते हुए पूंजीगत व्यय बढ़ाकर 2.19 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है। इसके अलावा रक्षा अनुसंधान और विकास (R&D) के लिए 17,250 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है, जो पिछले वर्ष 14,923 करोड़ रुपए था। पेंशन मद में भी वृद्धि करते हुए 1.71 लाख करोड़ रुपये रखे गए हैं।
राजनाथ सिंह बोले, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का संतुलन
बजट पेश होने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक सफलता के बाद आया यह बजट देश की रक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के सरकार के संकल्प को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष सेनाओं के कुल पूंजीगत व्यय के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उनके अनुसार बजट का सबसे अहम पहलू तीनों सेनाओं का आधुनिकीकरण है। साथ ही भूतपूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण को प्राथमिकता दी गई है। भूतपूर्व सैनिक स्वास्थ्य योजना के तहत बजट में करीब 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए 12,100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
लगातार बढ़ता रक्षा बजट और 2047 का विजन
रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि यह बजट तकनीकी रूप से उन्नत और आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था की दिशा में निर्णायक कदम है, जो वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के विजन के अनुरूप है। मंत्रालय के अनुसार मोदी सरकार के कार्यकाल में रक्षा बजट में लगातार वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2021-22 में यह 4.84 लाख करोड़ रुपए था, जो 2022-23 में 5.25 लाख करोड़, 2023-24 में 5.94 लाख करोड़, 2024-25 में 6.2 लाख करोड़ और 2025-26 में 6.81 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। बजट में सरल और प्रभावी खरीद प्रक्रियाओं के जरिए संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया है।












