दुनिया में कई अनोखी कहानियां सुनने को मिलती हैं, लेकिन पेरिस से सामने आई यह कहानी सच में हैरान कर देने वाली है। एक व्यक्ति ने होटल में कुछ दिनों के लिए कमरा लिया लेकिन वही कमरा उसकी पूरी जिंदगी का ठिकाना बन गया। यह शख्स 67 साल तक उसी होटल में रहा और आखिरकार बुढ़ापे में जाकर वहां से चेकआउट किया। इस कहानी का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा यह है कि उसने अपनी जवानी से लेकर बुढ़ापे तक का पूरा सफर उसी कमरे में बिताया। आज के दौर में जहां लोग बार-बार घर बदलते हैं, वहां एक जगह पर इतने साल रहना अपने आप में एक अनोखी बात है।
इस अनोखी कहानी के केंद्र में हैं जीन ले बोन। साल 1957 में वह एक ट्रैवलिंग सेल्समैन के तौर पर पेरिस पहुंचे थे। काम के सिलसिले में उन्होंने एक होटल में कुछ दिनों के लिए कमरा बुक किया था। शुरुआत में उनका इरादा बस थोड़े समय के लिए रुकने का था लेकिन होटल की सुविधाएं, आरामदायक माहौल और आसान जीवनशैली उन्हें इतनी पसंद आई कि उन्होंने वहीं रुकने का फैसला कर लिया। धीरे-धीरे उनका यह अस्थायी ठहराव स्थायी बन गया।
दिन बीतते गए, महीने सालों में बदलते गए और देखते ही देखते जीन ने 67 साल उसी होटल के कमरे में गुजार दिए। उन्होंने कभी अलग से घर लेने की जरूरत महसूस नहीं की। होटल में उन्हें हर सुविधा आसानी से मिल जाती थी-समय पर खाना, रोजाना सफाई, और बिना किसी जिम्मेदारी के आरामदायक जीवन। यही वजह रही कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी वहीं बिताने का फैसला जारी रखा।
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इतने लंबे समय तक एक ही जगह रहने के कारण जीन का होटल स्टाफ के साथ खास रिश्ता बन गया था। कर्मचारी उन्हें सिर्फ एक गेस्ट की तरह नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह देखने लगे थे। पुराने स्टाफ उन्हें अच्छी तरह जानते थे जबकि नए कर्मचारियों को उनके बारे में बताया जाता था। इस तरह वह होटल के माहौल का स्थायी हिस्सा बन गए थे।
जीन ले बोन ने अपनी जिंदगी के 67 साल उसी कमरे में बिताए लेकिन इस दौरान उन्होंने दुनिया में हो रहे बड़े-बड़े बदलावों को महसूस किया। राजनीति, समाज और अर्थव्यवस्था में आए उतार-चढ़ाव उन्होंने वहीं रहते हुए देखे। होटल में कई बार मरम्मत और बदलाव हुए, स्टाफ बदला, लेकिन जीन वहीं रहे। समय बदलता रहा लेकिन उनकी जिंदगी उसी जगह पर स्थिर बनी रही।
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इतने लंबे समय तक होटल में रहना सस्ता नहीं हो सकता। बताया जाता है कि जीन ने अपने 67 साल के ठहराव के दौरान करीब 2.5 मिलियन डॉलर खर्च किए। अगर भारतीय रुपये में देखें तो यह रकम करीब 21 करोड़ रुपये के आसपास बैठती है। औसतन हर साल करीब 37 हजार डॉलर खर्च हुए, यानी रोजाना लगभग 100 डॉलर के आसपास। हालांकि होटल प्रबंधन ने उन्हें कई बार छूट और विशेष रेट्स भी दिए क्योंकि वह इतने लंबे समय से वहां रह रहे थे।
यह सवाल हर किसी के मन में आता है कि आखिर जीन ने ऐसा जीवन क्यों चुना। कुछ लोग इसे एक आसान और जिम्मेदारी मुक्त जीवन मानते हैं, जहां घर की देखभाल, बिल और बाकी झंझटों से छुटकारा मिलता है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि यह अकेलेपन का संकेत भी हो सकता है, जहां इंसान एक ही जगह तक सीमित रह जाता है। लेकिन जो भी हो, यह कहानी दुनिया भर में लोगों को सोचने पर मजबूर जरूर करती है।