
ग्वालियर। एक ग्राहक को वेज बर्गर की जगह नॉनवेज बर्गर भेजने का मामला जोमैटो और बर्गर बडी को भारी पड़ गया। उपभोक्ता फोरम ने इसे सेवा में गंभीर त्रुटि मानते हुए 10 हजार रुपए की क्षतिपूर्ति और 2 हजार रुपए केस लड़ने का खर्च अदा करने का आदेश दिया है। कंपनियों को यह राशि 45 दिन के भीतर उपभोक्ता को देनी होगी।
क्या है पूरा मामला?
ग्वालियर निवासी आशीष शर्मा ने 2 फरवरी 2024 को जोमैटो के जरिए बर्गर बडी से एक वेज बर्गर ऑर्डर किया था। लेकिन जब ऑर्डर डिलीवर हुआ तो उसमें नॉनवेज बर्गर निकला। इससे आशीष की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और उन्होंने उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई। बर्गर बडी और जोमैटो ने मामले में खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि डिलीवरी में गलती हुई है, लेकिन फोरम ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए दोनों को दोषी ठहराया।
क्या बोले बर्गर बडी और जोमैटो
मामले को लेकर बर्गर बडी का तर्क था कि उन्होंने सही ऑर्डर भेजा था, लेकिन डिलीवरी एजेंट ने गलती से वेज बर्गर किसी और को दे दिया और नॉनवेज बर्गर किसी और को। वहीं जोमैटो का कहना था कि वे केवल एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म हैं और कैफे की गलती के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। हालांकि, उपभोक्ता फोरम ने इन दलीलों को खारिज कर दिया और कहा कि यह सेवा में गंभीर लापरवाही का मामला है।
शिकायतकर्ता ने क्या कहा
आशीष शर्मा ने उपभोक्ता फोरम में शपथ पत्र दायर कर बताया कि वह कट्टर ब्राह्मण हैं और नॉनवेज खाने से उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। इस गलती से उन्हें मानसिक पीड़ा भी हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह गलती नहीं बल्कि एक योजनाबद्ध व्यापारिक लापरवाही थी।
फोरम का फैसला
फोरम ने अपने फैसले में जोमैटो और बर्गर बडी को दोषी मानते हुए 10 हजार रुपए की क्षतिपूर्ति और 2 हजार रुपए का कानूनी खर्च अदा करने का आदेश दिया। साथ ही, फोरम ने तर्क दिया कि अगर शिकायतकर्ता ने खुद ऑर्डर बदला होता, तो उसे 500 रुपए बोनस के रूप में क्यों दिए गए। फोरम ने आदेश दिया कि कंपनियों को 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को यह राशि देनी होगी। यदि वे ऐसा करने में असफल रहते हैं, तो उन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
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