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ग्वालियर के केआरएच अस्पताल में नई पहल :वार्डों को दिए गए धार्मिक नाम, मरीजों को मिलेगा आस्था का सहारा

ग्वालियर के कमलाराजा अस्पताल (केआरएच) में नई पहल के तहत कई वार्डों के नाम धार्मिक रखे गए हैं। कुपोषण वार्ड अब ‘संकट मोचन’ और थैलेसीमिया वार्ड ‘बाल गोपाल’ के नाम से जाना जाएगा। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि इससे मरीजों और परिजनों का मनोबल बढ़ेगा।
वार्डों को दिए गए धार्मिक नाम, मरीजों को मिलेगा आस्था का सहारा
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल समूह के अंतर्गत आने वाला कमलाराजा अस्पताल (केआरएच) कभी अव्यवस्थाओं के कारण चर्चा में रहता था, लेकिन अब यहां व्यवस्थाओं में सुधार के साथ कई नए नवाचार भी देखने को मिल रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन ने एक अनूठी पहल करते हुए अस्पताल के कई वार्डों के नाम धार्मिक और सांस्कृतिक आधार पर बदल दिए हैं। अब मरीज और उनके परिजन वार्डों को पारंपरिक चिकित्सा नामों की जगह धार्मिक नामों से पहचानेंगे।

    वार्डों को दिए गए नए धार्मिक नाम

    अस्पताल प्रबंधन ने कई वार्डों के नाम बदलकर उन्हें धार्मिक पहचान दी है।

    पहले गंभीर कुपोषण वार्ड के नाम से जाना जाने वाला वार्ड अब संकट मोचन वार्ड कहलाएगा।

    थैलेसीमिया वार्ड का नाम बदलकर बाल गोपाल वार्ड रखा गया है।

    पीआईसीयू (PICU) को अब श्री बांके बिहारी वार्ड के नाम से जाना जाएगा।

    प्रसूता महिलाओं के लिए बने वार्ड का नाम माता कौशल्या एवं सीता वार्ड रखा गया है।

    आरईआईसी वार्ड का नाम बदलकर शिव शक्ति वार्ड कर दिया गया है।

    चिल्ड्रन वार्ड को अब श्री गणेश एवं माधव वार्ड कहा जाएगा।

    बच्चों के एक अन्य वार्ड को भी बाल गोपाल वार्ड नाम दिया गया है।

    अस्पताल प्रशासन का मानना है कि इन नामों से मरीजों और उनके परिजनों को मानसिक रूप से सकारात्मक ऊर्जा और आस्था का सहारा मिलेगा।

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    आस्था से बढ़ेगा मरीजों का मनोबल

    अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराएं लोगों की भावनाओं से गहराई से जुड़ी होती हैं। ऐसे में जब मरीज और उनके परिवार कठिन परिस्थितियों में अस्पताल आते हैं, तो धार्मिक नाम और वातावरण उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बना सकते हैं।

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    अस्पताल में व्यवस्थाओं में भी सुधार

    केआरएच में केवल वार्डों के नाम ही नहीं बदले गए हैं, बल्कि व्यवस्थाओं को भी बेहतर बनाया गया है। अस्पताल के डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ ने कुछ समय पहले नए सहायक अधीक्षक की नियुक्ति की थी। उनके प्रयासों से अस्पताल में सफाई व्यवस्था में सुधार हुआ है और सिक्योरिटी भी अधिक सक्रिय हुई है। इसके अलावा अस्पताल में कर्मचारियों के जन्मदिन मनाने की नई परंपरा भी शुरू की गई है, जिससे कर्मचारियों में सकारात्मक माहौल बना है।

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    क्या कहते हैं अस्पताल के अधिकारी

    सहायक अधीक्षक डॉ. हितेन्द्र यादव का कहना है कि अस्पताल की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि लोगों को सनातन संस्कृति से जोड़ने के उद्देश्य से पीडियाट्रिक्स और गायनिक विभाग के वार्डों को धार्मिक नाम दिए गए हैं।

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    मरीजों के परिजनों ने भी की सराहना

    अस्पताल में आए मरीजों के परिजनों का कहना है कि अब यहां की व्यवस्था पहले से काफी बेहतर हो गई है। मरीज की अटेंडर सुनीता चौहान बताती हैं कि उनकी ननद की डिलीवरी इसी अस्पताल में हुई है। वे पहले भी यहां आ चुकी हैं, लेकिन अब सफाई और अन्य व्यवस्थाएं पहले से काफी बेहतर हो गई हैं और माहौल निजी अस्पताल जैसा महसूस होता है।

    वहीं मरीज की अटेंडर मालती शर्मा का कहना है कि उनके मरीज का इलाज पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में चल रहा है और यहां किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने कहा कि वार्डों के नाम में किया गया बदलाव भी एक सराहनीय प्रयास है।

    Shivani Gupta
    By Shivani Gupta

    शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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