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अब खाने की पैकिंग में नहीं लगेगी स्टेपल पिन :FSSAI का बड़ा फैसला, केक-मिठाई से लेकर फूड पार्सल तक नए नियम लागू

FSSAI ने केक, मिठाई, स्नैक पैकेट, फूड पार्सल और टेकअवे मील की पैकेजिंग में स्टेपल पिन, धातु की पिन और तार के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जारी इस आदेश का उल्लंघन करने पर Food Safety Act 2006 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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FSSAI का बड़ा फैसला, केक-मिठाई से लेकर फूड पार्सल तक नए नियम लागू

बिजनेस डेस्क। अगर आप अक्सर होटल, रेस्टोरेंट, बेकरी या मिठाई की दुकानों से खाना पैक करवाते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देशभर में खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब खाने-पीने की चीजों, केक, मिठाई के डिब्बों, स्नैक पैकेट और फूड पार्सल को बंद करने के लिए स्टेपल पिन, धातु की पिन या तार का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। खाद्य नियामक ने इसे उपभोक्ताओं की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं।

क्यों जारी करनी पड़ी एडवाइजरी?

FSSAI के अनुसार, हाल के महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें केक, मिठाई, स्नैक्स और अन्य खाद्य पैकेजिंग के अंदर या उनसे जुड़ी हुई स्टेपल पिन और धातु के तार मिले। कई बार पैकेजिंग को बंद करने के लिए इस्तेमाल की गई पिन खाने के संपर्क में आ गईं, जिससे ग्राहकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हुए।

प्राधिकरण का कहना है कि, अगर कोई व्यक्ति गलती से खाने के साथ इन पिनों को निगल लेता है, तो इससे गंभीर शारीरिक चोट लग सकती है। यही कारण है कि अब इस तरह की पैकेजिंग सामग्री पर पूरी तरह रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।

ग्राहकों की सेहत के लिए कितना बड़ा खतरा?

धातु की पिन या तार गलती से शरीर में पहुंच जाएं तो मुंह, गले और पाचन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। कई मामलों में आंतरिक चोट, संक्रमण और सर्जरी जैसी नौबत भी आ सकती है। FSSAI का मानना है कि, खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग में इस तरह की लापरवाही सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को जोखिम में डालती है। इसलिए खाद्य सुरक्षा मानकों को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

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किन उत्पादों पर लागू होगा नया नियम?

यह निर्देश केवल किसी एक प्रकार के खाद्य उत्पाद तक सीमित नहीं है। देशभर के सभी फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (FBOs) को इसका पालन करना होगा।

खाद्य उत्पाद/पैकेजिंग

पिन और तार का इस्तेमाल

केक और बेकरी प्रोडक्ट्स

प्रतिबंधित

मिठाई के डिब्बे

प्रतिबंधित

स्नैक पैकेट और पाउच

प्रतिबंधित

फूड पार्सल

प्रतिबंधित

टेकअवे मील

प्रतिबंधित

ऑनलाइन फूड डिलीवरी पैकेजिंग

प्रतिबंधित

अन्य सभी खाद्य पैकेजिंग

प्रतिबंधित

किन कारोबारियों पर लागू होगा आदेश?

FSSAI की यह एडवाइजरी सभी खाद्य व्यवसाय संचालकों (Food Business Operators) पर लागू होगी, जिनमें शामिल हैं-

  • होटल
  • रेस्टोरेंट
  • बेकरी
  • मिठाई दुकानें
  • कैटरिंग सर्विस
  • स्नैक निर्माता
  • फूड डिलीवरी आउटलेट
  • पैक्ड फूड कंपनियां

इन सभी को अपनी पैकेजिंग प्रक्रिया में तत्काल बदलाव करने होंगे।

अब क्या इस्तेमाल करना होगा?

FSSAI ने कारोबारियों को सलाह दी है कि, वे पैकेजिंग के लिए सुरक्षित विकल्प अपनाएं। इनमें शामिल हो सकते हैं-

  • फूड-ग्रेड टेप
  • सुरक्षित पैकेजिंग सील
  • फूड-ग्रेड थ्रेड
  • हीट सीलिंग तकनीक
  • एडहेसिव स्ट्रिप्स

इन विकल्पों से पैकेजिंग सुरक्षित रहेगी और उपभोक्ताओं के लिए कोई स्वास्थ्य जोखिम भी नहीं होगा।

FSSAI

नियम तोड़ने पर क्या होगी कार्रवाई?

FSSAI ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि निर्देशों का पालन नहीं करने वाले फूड बिजनेस ऑपरेटर्स के खिलाफ Food Safety and Standards Act, 2006 के तहत कार्रवाई की जाएगी। उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कारोबारी के खिलाफ जुर्माना, लाइसेंस संबंधी कार्रवाई, कानूनी कार्यवाही और अन्य दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।

राज्यों को भी दिए गए निगरानी के निर्देश

इस एडवाइजरी की प्रति सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को भेजी गई है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में निरीक्षण बढ़ाएं और सुनिश्चित करें कि कोई भी कारोबारी खाद्य पैकेजिंग में स्टेपल पिन या धातु के तार का इस्तेमाल न करे।

क्या है FSSAI का मकसद?

FSSAI का कहना है कि, इस फैसले का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को पैकेजिंग से जुड़े अनावश्यक स्वास्थ्य जोखिमों से बचाना है। साथ ही खाद्य सुरक्षा मानकों को और मजबूत बनाना तथा सुरक्षित पैकेजिंग को बढ़ावा देना भी इस पहल का हिस्सा है। खाद्य नियामक का मानना है कि, सुरक्षित पैकेजिंग से ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा और खाद्य उद्योग में बेहतर गुणवत्ता मानकों को अपनाने में मदद मिलेगी।

Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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