नई दिल्ली। भारत सरकार ने चांदी और बिना जड़े हुए आभूषणों के आयात पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 31 मार्च 2026 तक इनकी इंपोर्ट पॉलिसी को फ्री से बदलकर रेस्ट्रिक्टेड कर दिया है। इसका मतलब यह है कि अब इन वस्तुओं का आयात करने के लिए सरकार से विशेष अनुमति या लाइसेंस लेना जरूरी होगा। यह कदम अचानक नहीं उठाया गया, बल्कि इसके पीछे बीते कुछ महीनों में चांदी के आयात में असामान्य बढ़ोतरी, खासकर थाईलैंड से आयात को लेकर बढ़ी चिंताएं हैं। डायरेक्टरेट जनरल आॅफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) ने बुधवार को जारी अधिसूचना में कहा कि चांदी और उससे बने बिना जड़े हुए आभूषणों के आयात पर यह नया नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और यह 31 मार्च 2026 तक लागू रहेगा। इस अधिसूचना के तहत चांदी से बने आभूषण, उनके हिस्से और अन्य उत्पाद इस श्रेणी में शामिल होंगे।
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सरकार ने यह सख्ती इसलिए की क्योंकि आंकड़ों में यह बात सामने आई कि हाल ही में चांदी का बहुत बड़ा हिस्सा थाईलैंड से आयात किया जा रहा है। थाईलैंड खुद चांदी का उत्पादन करने वाला देश नहीं है, इसलिए इस बढ़ते आयात के पीछे कर चोरी की आशंका जताई गई। अधिकारियों के अनुसार, यह मामला एशियान-इंडिया ट्रेड इन गुड्स एग्रीमेंट (ऐटिगा) के तहत ड्यूटी बचाने की कोशिश का हिस्सा है। इस समझौते के तहत भारत और एशियान देशों के बीच व्यापार पर कुछ उत्पादों पर आयात शुल्क में छूट दी जाती है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हाल के महीनों में थाईलैंड से करीब 40 मीट्रिक टन चांदी आयात की गई, जबकि यह देश उत्पादन नहीं करता। यह साफ तौर पर ड्यूटी बचाने की कोशिश है। कुल आयात का लगभग 98% हिस्सा थाईलैंड से ही आ रहा था। ये आंकड़े सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गए, क्योंकि इससे देश को भारी राजस्व हानि हो रही थी।
आशियान यानी एसोसिएशन आॅफ साउथईस्ट एशियन नेशंस में कुल 10 देश शामिल हैं—ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम। इन देशों के साथ भारत का विशेष व्यापारिक समझौता है, जिसका फायदा उठाकर कुछ व्यापारी कर चोरी कर रहे थे। अब रेस्ट्रिक्टेड कैटेगरी में आने के बाद इन वस्तुओं का आयात केवल तभी संभव होगा जब आयातक को सरकार से विशेष अनुमति प्राप्त हो। सरकार का यह फैसला न केवल चांदी के आयात में हो रही गड़बड़ियों पर रोक लगाएगा, बल्कि घरेलू आभूषण उद्योग को भी राहत देगा। इससे देश में पारदर्शी व्यापारिक माहौल बनेगा और आयात शुल्क की चोरी करने वालों पर अंकुश लगेगा।
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इसके साथ ही सरकार ने गैर-बासमती चावल के निर्यात को लेकर भी एक नया नियम लागू किया है। अब गैर-बासमती चावल का निर्यात करने से पहले निर्यातकों को एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (एपीडा) के साथ अनुबंध पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की अप्रैल से अगस्त अवधि के दौरान भारत के चावल निर्यात में 6.4% की वृद्धि दर्ज की गई है।