वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध से बर्बाद हुई गाजा पट्टी में शांति और पुनर्निर्माण के लिए अपनी नई पहल ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक 19 फरवरी को वॉशिंगटन डीसी में आयोजित की। इस बैठक में गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण और स्थायी शांति के लिए ₹1.5 लाख करोड़ (लगभग 17.5 अरब डॉलर) का राहत पैकेज पेश किया गया। भारत ने ऑब्जर्वर देश के रूप में हिस्सा लिया, जबकि रूस और चीन पूरी तरह से दूरी बनाए हुए हैं। यह बैठक विश्व के लगभग 50 देशों और यूरोपीय संघ (EU) के अधिकारियों की उपस्थिति में हुई।
भारत ने इस बैठक में ऑब्जर्वर देश के रूप में हिस्सा लिया। भारतीय प्रतिनिधि के रूप में नमग्या सी खम्पा, भारतीय दूतावास में चार्ज डी अफेयर्स, मौजूद रहीं। भारत ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि, वह बोर्ड का पूर्ण सदस्य बनेगा या नहीं। जनवरी में दावोस में आयोजित लॉन्च कार्यक्रम में भारत शामिल नहीं हुआ था।
इस बैठक में भारत ने संतुलन बनाए रखा और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। अमेरिका ने इसे गाजा के पुनर्निर्माण और शांति स्थापना के लिए एक प्रमुख प्लेटफॉर्म बताया।
इस पहल में कुल 27 देश बोर्ड के सदस्य हैं। इसमें शामिल हैं-
अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, हंगरी, पाकिस्तान, सऊदी अरब, UAE, इजराइल, बेलारूस, मिस्र, इंडोनेशिया, जॉर्डन, मोरक्को, कतर, तुर्की, उज्बेकिस्तान, वियतनाम।
ऑब्जर्वर देशों में शामिल हुए
भारत, जर्मनी, इटली, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन। ये देश बोर्ड के निर्णयों में सीधे शामिल नहीं हैं, लेकिन बैठक में अपने वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से योगदान दे रहे हैं।
बैठक में रूस, चीन, फ्रांस और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के अन्य स्थायी सदस्य शामिल नहीं हुए। ट्रंप ने उम्मीद जताई कि भविष्य में ये देश भी बोर्ड में शामिल होंगे।
बैठक में गाजा के पुनर्निर्माण के लिए कुल 1.5 लाख करोड़ रुपए (लगभग 17.5 अरब डॉलर) के राहत पैकेज की घोषणा की गई।
ट्रंप ने कहा कि, यह रकम युद्ध पर होने वाले खर्च के मुकाबले बहुत छोटी है। उनका मानना है कि, अगर सभी देश साथ आएं तो गाजा में स्थायी शांति स्थापित की जा सकती है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि कितने सैनिक तैनात होंगे और फंड का उपयोग कैसे किया जाएगा।
बैठक का एक मुख्य एजेंडा था इंटरनेशनल स्टैबलाइजेशन फोर्स का गठन। इसके तहत अनुमानित रूप से 12,000 पुलिस और 20,000 सैनिक तैनात किए जाएंगे। इसका उद्देश्य है-
हालांकि हमास ने कहा है कि, जब तक इजराइली सेना पूरी तरह नहीं हटती, वह हथियार नहीं छोड़ेगा। इजराइल ने हमास को 60 दिन का समय दिया है कि वह अपने हथियार पूरी तरह से छोड़ दे।
बैठक में प्रमुख नेता और प्रतिनिधि शामिल हुए-
डोनाल्ड ट्रंप ने बैठक में कहा कि, बोर्ड केवल गाजा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर संघर्षों को सुलझाने में भी सक्रिय भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि, यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र की निगरानी करेगा और सुनिश्चित करेगा कि संस्थाएं अपने दायित्वों को सही तरीके से निभा रही हैं।
ट्रंप ने चीन और रूस के शामिल होने की उम्मीद जताई और कहा कि उनके व्यक्तिगत संबंध चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अच्छे हैं।
बैठक में ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपनाया और कहा कि अगले 10 दिनों में यह तय हो जाएगा कि अमेरिका को सैन्य कार्रवाई करनी होगी या कोई समझौता होगा।
गाजा में पिछले ढाई साल के युद्ध ने भारी विनाश और मानवीय संकट खड़ा कर दिया है। इस दौरान लगभग 75,000 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जिनमें से 83% आम नागरिक हैं और करीब 20,000 बच्चे शामिल हैं। युद्ध में लगभग 1.7 लाख लोग घायल हुए, जबकि 19 लाख लोग बेघर हुए हैं। इसके अलावा, गाजा की लगभग 78% इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और करीब 22 लाख लोग अकाल और संसाधनों की कमी का सामना कर रहे हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि गाजा में हर डॉलर का खर्च स्थिरता और बेहतर भविष्य बनाने में निवेश के रूप में किया जा रहा है।
ट्रंप का लक्ष्य है कि, यह बोर्ड केवल गाजा के युद्धविराम तक सीमित न रहे, बल्कि ग्लोबल डिप्लोमेसी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाए। बोर्ड के चार्टर के अनुसार, जो देश तीन साल से ज्यादा समय तक सदस्य रहना चाहते हैं, उन्हें 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि, इस पहल से UN की भूमिका पर प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन ट्रंप का मानना है कि यह वैश्विक संघर्ष समाधान और शांति निर्माण का नया रास्ता खोल सकता है।