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एवियन :एक शहर, दो दौर... 1938 का इतिहास और 2026 का G7 समिट

फ्रांस का एवियन शहर एक बार फिर दुनिया की राजनीति का केंद्र बना है। G7 समिट के बीच पीएम नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात चर्चा में है। वहीं 1938 की ऐतिहासिक एवियन कॉन्फ्रेंस और मौजूदा पश्चिम एशिया संकट के कारण भी यह शहर सुर्खियों में है।
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एक शहर, दो दौर... 1938 का इतिहास और 2026 का G7 समिट

फ्रांस का छोटा सा शहर एवियन इन दिनों दुनिया की सबसे बड़ी कूटनीतिक चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है। G7 शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहे इस शहर में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता जुटे हैं। यहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बहुप्रतीक्षित मुलाकात भी होने जा रही है। हालांकि एवियन सिर्फ मौजूदा G7 समिट की वजह से ही चर्चा में नहीं है। यह शहर इतिहास के एक ऐसे अध्याय का भी गवाह रहा है, जिसे आज भी दुनिया याद करती है। 1938 में यहीं एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हुआ था, जिसका मकसद यूरोप में यहूदियों की स्थिति पर चर्चा करना था। अब 88 साल बाद फिर यही शहर अंतरराष्ट्रीय संकट और पश्चिम एशिया की राजनीति के केंद्र में खड़ा दिखाई दे रहा है।

मोदी-ट्रंप मुलाकात पर दुनिया की नजर

G7 समिट के दौरान आउटरीच सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप आमने-सामने आए। नेताओं की समूह तस्वीर के बाद सम्मेलन हॉल में दोनों नेताओं के बीच बातचीत भी हुई। फरवरी 2025 के बाद यह उनकी पहली प्रत्यक्ष मुलाकात मानी जा रही है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अंतिम चरण में बताया जा रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि इस मुलाकात के नतीजे आने वाले समय में दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय कर सकते हैं।

G7 में भारत की बढ़ती अहमियत

G7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और जापान शामिल हैं। भारत इसका स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से उसे विशेष आमंत्रित देश के रूप में बुलाया जा रहा है। आर्थिक आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत आज दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। इसके बावजूद उसे अभी तक G7 की स्थायी सदस्यता नहीं मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार कई वर्षों से G7 बैठकों में हिस्सा लेते आ रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है।

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ट्रंप और यूरोपीय नेताओं के बीच बढ़ी दूरी

G7 समिट ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका और कई यूरोपीय देशों के बीच पश्चिम एशिया को लेकर मतभेद सामने आए हैं। सम्मेलन में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों भी मौजूद हैं। हाल के महीनों में ईरान और पश्चिम एशिया से जुड़े कई मुद्दों पर इन नेताओं और डोनाल्ड ट्रंप के बीच सार्वजनिक मतभेद देखने को मिले हैं। ऐसे में G7 समिट को केवल आर्थिक मंच नहीं बल्कि राजनीतिक संदेशों का मंच भी माना जा रहा है।

1938 की एवियन कॉन्फ्रेंस क्यों याद की जाती है?

एवियन का नाम इतिहास में सबसे ज्यादा 1938 की एवियन कॉन्फ्रेंस के कारण दर्ज है। यह सम्मेलन तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट की पहल पर आयोजित किया गया था। उस समय यूरोप में यहूदियों पर अत्याचार बढ़ रहे थे और कई देशों से अपील की गई थी कि वे शरणार्थियों को अपने यहां जगह दें। सम्मेलन में शामिल देशों ने सहानुभूति तो दिखाई, लेकिन अधिकांश देशों ने यहूदी शरणार्थियों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इतिहासकार मानते हैं कि इस सम्मेलन की विफलता ने जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर को यह संदेश दिया कि दुनिया यहूदियों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने को तैयार नहीं है। बाद में यही घटनाक्रम होलोकॉस्ट जैसी भयावह त्रासदी तक पहुंचा, जिसमें लाखों यहूदियों की जान गई।

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पश्चिम एशिया संकट के बीच फिर चर्चा में एवियन

आज जब एवियन में G7 समिट हो रहा है, तब पश्चिम एशिया एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद नई राजनीतिक परिस्थितियां बनी हैं, जबकि इजरायल ने अपने सुरक्षा रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई है। डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल के दिनों में इजरायल की नीतियों पर खुलकर टिप्पणी की है। वहीं इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि उनके देश के सुरक्षा फैसले किसी बाहरी दबाव के आधार पर नहीं होंगे।

इतिहास और वर्तमान का अनोखा संगम

एवियन आज सिर्फ एक पर्यटन शहर या मिनरल वॉटर ब्रांड का नाम नहीं है। यह ऐसा स्थान बन चुका है जहां इतिहास और वर्तमान बार-बार एक-दूसरे से टकराते नजर आते हैं। 1938 की विफल कूटनीति से लेकर 2026 की दुनया भर की चुनौतियों तक, यह शहर दुनिया को याद दिलाता है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लिए गए फैसले केवल तत्काल राजनीति नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को भी प्रभावित करते हैं।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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