यूथ ने चुनाव को बनाया खास
नेपाल में हुए नए चुनाव में युवाओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। माना जा रहा है कि इस चुनाव के बाद प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की जगह नई सरकार का गठन होगा। अगर हालात सामान्य होते तो शायद यह चुनाव इतना चर्चा में नहीं रहता, लेकिन जेन-जी आंदोलन ने इसे वैश्विक स्तर पर सुर्खियों में ला दिया।
जेन-जी आंदोलन से बदला राजनीतिक माहौल
नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ और सुशासन की मांग को लेकर युवाओं ने जेन-जी आंदोलन शुरू किया था। सोशल मीडिया साइट्स पर बैन के बावजूद युवाओं ने राजधानी काठमांडू समेत कई जगहों पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए। जिसमें भारी मात्रा में नुकसान हुआ था, इसमें कई प्रदर्शनकारी और पुलिस अधिकारी गंभीर रूप से घायल हुए थे। हालांकि इस फेसले से देश की राजनीतिक दिशा में सुधार दिखा है जो भविष्य के लिए बेहतर माना जा रहा है।
प्रदर्शनों में हिंसा, कई की मौत
आंदोलन के दौरान, हालात हिंसक हो गए थे। पुलिस की गोलीबारी में कम से कम 19 लोगों की मौत हुई थी। हालात इतने बिगड़ गए थे कि दो दिनों के भीतर 77 लोगों की जान चली गई और करीब 84 अरब रुपये से ज्यादा की संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
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ओली सरकार ने आंदोलन के आगे इस्तीफा दिया
हालात पर काबू पाने में नाकाम रहने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पद छोड़ना पड़ा। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि ओली समेत कई बड़े नेताओं को सेना के हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा। राजनीतिक संकट के बीच सुशीला कार्की के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन किया गया। इसी सरकार ने प्रतिनिधि सभा को भंग करते हुए देश में नए चुनाव कराने की सिफारिश की थी।
पिछले कुछ वर्षों में नेपाल लगातार राजनीतिक अस्थिरता से गुजर रहा है। इसके चलते बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं भी बढ़ती गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव देश में स्थिर सरकार बनाने और संविधान व्यवस्था को पटरी पर लाने की दिशा में अहम साबित हो सकता है।











