देशभर में इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोटा एक प्रमुख एजुकेशन हब बन चुका है। हर साल यहां लाखों छात्र JEE और NEET की तैयारी के लिए पहुंचते हैं। हालांकि, कोचिंग और रहने का खर्च कई परिवारों के लिए भारी पड़ता है। ऐसे में स्कॉलरशिप योजनाएं छात्रों को काफी मदद करती है
कोटा के कई बड़े कोचिंग संस्थान अब स्कॉलरशिप के जरिए छात्रों को फ्री या बहुत कम फीस में पढ़ाई का अवसर दे रहे हैं। इन योजनाओं के तहत मेधावी छात्रों को 50% से लेकर 100% तक फीस में छूट मिल सकती है। कुछ टॉप रैंकर्स की पूरी कोचिंग फीस भी माफ कर दी जाती है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी मदद मिलती है।
अधिकांश कोचिंग संस्थान एडमिशन से पहले स्कॉलरशिप टेस्ट आयोजित करते हैं। इन परीक्षाओं में छात्रों के प्रदर्शन के आधार पर उन्हें फीस में छूट दी जाती है। टेस्ट में अच्छा स्कोर करने वाले छात्रों को ज्यादा स्कॉलरशिप मिलती है, जबकि टॉप करने वालों को 100% तक छूट मिल सकती है। जिसके बाद ये सभी स्टूडेंट्स एडमिशन लेने के लिए एलिजिबल हो जाते हैं।

स्कॉलरशिप टेस्ट का सिलेबस आमतौर पर स्कूल के सिलेबस पर आधारित होता है। इसमें वही विषय और टॉपिक्स पूछे जाते हैं, जो छात्र अपनी कक्षा में पढ़ते हैं। ऐसे में अलग से तैयारी की जरूरत बिल्कुल नहीं होती, लेकिन मजबूत बेस और कॉन्सेप्ट क्लियर होना जरूरी है ताकि बेहतर अंक हासिल किए जा सकें और इस स्कीम में आसाना से प्रवेश ल सके।

स्कॉलरशिप पाने के लिए छात्रों को संबंधित कोचिंग संस्थान की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। रजिस्ट्रेशन के बाद छात्र टेस्ट की तारीख और मोड ऑनलाइन और ऑफलाइन चुन सकते हैं। परीक्षा के कुछ समय बाद ही रिजल्ट जारी कर दिया जाता है और उसी के आधार पर स्कॉलरशिप तय होती है।
इन स्कॉलरशिप टेस्ट में आमतौर पर कक्षा 6वीं से 12वीं तक के छात्र और ड्रॉपर्स शामिल हो सकते हैं। इससे शुरुआती स्तर से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों तक सभी को लाभ मिलता है। लेकिन ध्यान रहे कि परीक्षा में निर्धारित मार्क्स लाने वाले स्टूडेंट्स को ही स्कॉलरशिप मिलती है।
स्कॉलरशिप पाने वाले छात्रों को सिर्फ फीस में छूट ही नहीं, बल्कि कई अतिरिक्त सुविधाएं भी मिलती हैं। इनमें अनुभवी फैकल्टी द्वारा पढ़ाई, नियमित टेस्ट सीरीज, स्टडी मैटेरियल, डाउट सॉल्विंग और करियर गाइडेंस शामिल हैं, जो उनकी तैयारी को और मजबूत बनाते हैं।
पहले जहां कोटा में पढ़ाई और रहने का खर्च सालाना 4 से 5 लाख रुपये तक पहुंच जाता था, वहीं अब इसमें कमी आई है। कोचिंग फीस के साथ-साथ हॉस्टल और पीजी का खर्च भी घटा है। ऐसे में स्कॉलरशिप मिलने पर छात्रों का कुल खर्च काफी कम हो जाता है।