नेशनल डेस्क। संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत सोमवार को जोरदार हंगामे के बीच हुई। राज्यसभा और लोकसभा दोनों सदनों में विपक्षी दलों के विरोध के कारण कार्यवाही प्रभावित रही। इस दौरान राज्यसभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान, अमेरिका, इजरायल के बीच जारी संघर्ष पर भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि-मौजूदा हालात को देखते हुए क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए बातचीत और कूटनीति ही सबसे प्रभावी रास्ता है।
राज्यसभा में पश्चिम एशिया में बीते कई दिनों से जारी संघर्ष पर चर्चा के दौरान विदेश मंत्री ने कहा कि-भारत सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस पूरे घटनाक्रम की निगरानी कर रहे हैं।
जयशंकर ने आगे कहा कि-भारत ने पहले ही इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने दोहराया कि तनाव को कम करने के लिए संवाद और कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाना जरूरी है।
हालांकि, जब विदेश मंत्री सदन में जवाब दे रहे थे, तब विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी और विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। इसी तरह लोकसभा में भी विपक्षी दलों ने कई मुद्दों को लेकर हंगामा किया, जिससे कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित हुई।
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विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि-सरकार ऊर्जा बाजार की उपलब्धता, कीमतों और जोखिमों पर लगातार नजर रख रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक भी आयोजित की गई थी, जिसमें क्षेत्र में हुए हवाई हमलों और खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव पर चर्चा हुई।
विदेश मंत्री ने बताया कि पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार के लिए सबसे जरुरी मुद्दा है। इसी को लेकर उन्होंने कहा कि- अब तक लगभग 67 हजार भारतीय अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार कर सुरक्षित जगहों पर पहुंच चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि खाड़ी देशों में एक करोड़ से ज्यादा भारतीय काम करते हैं, जबकि ईरान में भी हजारों भारतीय छात्र और पेशेवर मौजूद हैं। ऐसे में क्षेत्र में जारी संघर्ष भारत के लिए विशेष चिंता का विषय है।