नेशनल डेस्क। महाराष्ट्र के नासिक में दुष्कर्म मामले में गिरफ्तार अशोक खरात उर्फ भोंदू बाबा को लेकर जांच तेज होती जा रही है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे उसके प्रभाव और संपर्कों का दायरा सामने आ रहा है। खुद को ‘भगवान का उत्तराधिकारी’ बताने वाला अशोक कथित तौर पर नेताओं, अफसरों, कारोबारियों और आम लोगों को अपने प्रभाव में लेता था। जांच एजेंसियों को संकेत मिले हैं कि चुनावी दौर में कई राजनीतिक चेहरे भी उसके संपर्क में रहे।
सूत्रों के मुताबिक लोकसभा, विधानसभा और नगरपालिका चुनाव के दौरान कुछ नेताओं ने टिकट पाने और जीत सुनिश्चित करने के लिए अशोक खरात के दरबार में हाजिरी लगाई थी। दावा किया जा रहा है कि कुछ नेताओं ने तंत्र विद्या और टोटकों के जरिए चुनाव में सफलता पाने की कोशिश की। एक महिला नेत्री के भी अशोक के संपर्क में आने की बात सामने आई है, जहां कथित तौर पर चौंकाने वाले परिणाम दिलाने का भरोसा देकर विशेष पूजा कराने के लिए दबाव बनाया गया।
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मामले की जांच कर रही SIT को अहम सुराग मिले हैं। सूत्रों के अनुसार संबंधित महिला नेत्री और उनके परिवार के कई बार अशोक के कार्यालय आने-जाने के सीसीटीवी फुटेज जांच एजेंसियों को मिले हैं। संभावना जताई जा रही है कि SIT जल्द ही इस मामले में संबंधित लोगों से पूछताछ कर सकती है। फुटेज के आधार पर बाबा के संपर्कों का दायरा और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
पुलिस के अनुसार अब तक अशोक खरात के खिलाफ धोखाधड़ी, महिलाओं के कथित शोषण और अंधविश्वास के नाम पर ठगी सहित 6 अलग-अलग मामले दर्ज किए जा चुके हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। SIT संभावित पीड़ितों की पहचान भी कर रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि वे किसी तरह की ठगी या शोषण का शिकार हुए हैं, तो बिना झिझक सामने आकर शिकायत दर्ज कराएं। पीड़ितों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है, ताकि आरोपी के खिलाफ ठोस सबूत जुटाए जा सकें।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने वरिष्ठ अधिवक्ता अजय मिसर को स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किया है। यह फैसला अदालत में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। अजय मिसर इससे पहले भी कई चर्चित मामलों में सरकार का पक्ष रख चुके हैं और जटिल मामलों की पैरवी का अनुभव रखते हैं।
अजय मिसर ने पूर्व में स्वारगेट बस डिपो यौन शोषण और बदलापुर उत्पीड़न जैसे मामलों में सरकारी पक्ष का प्रतिनिधित्व किया है। इसके अलावा मालेगांव बम विस्फोट 2008, दादर ओपेरा हाउस ब्लास्ट और अंडरवर्ल्ड से जुड़े मामलों में भी वे अदालत में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। ऐसे मामलों में उनके अनुभव को देखते हुए सरकार ने उन्हें इस केस की जिम्मेदारी सौंपी है।