अशोक गौतम,भोपाल। मप्र में 1400 किलोमीटर से ज्यादा की पांच नई रेल लाइन डाली जा रही हैं। इनमें दो से तीन साल के अंदर ट्रेनें दौड़ने लगेगी। इसका फायदा दो दर्जन से अधिक जिलों की तहसीलों के लाखों लोगों को होगा। इन रेल लाइनों के जरिए प्रदेश के महाकालेश्वर, त्रयंबकेश्वर, मैहर, शिर्डी धार्मिक स्थान रेल लाइन से जुड़ेंगे।
इसके साथ ही मुकुंदपुर जू, पन्ना, बांधवगढ़, रातापानी टाइगर रिजर्व और खजुराहो जैसे एतिहासिक स्थलों में भी रेल कनेक्टिविटी बढ़ेगी। इसके अलावा ये लाइनें सिंगरौली, सीमेंट उद्योग सतना, रामगंज मंडी, पीथमपुर सहित औद्योगिक कॉरिडोर के रूप में काम करेंगी। इन रेल लाइनों को तैयार करने में रेल मंत्रालय ने 40 हजार करोड़ से अधिक राशि खर्च करेगा।
लागत-8,914 करोड़ रुपए
लंबाई -541 किमी
यह परियोजना विंध्य को उत्तर-पूर्व से जोड़ने वाली विकास रेखा है, जिसका कार्य 2028 तक पूरी तरह से समाप्त करने का निर्देश दिया गया है। इससे सीध- सिंगरौली तक कनेक्टिविटी बढ़ेगी, औद्योगिक विकास होगा।
लागत-5,073 करोड़ रुपए
लंबाई-276.5 किमी
कोटा मंडल (राजस्थान) और भोपाल मंडल के बीच सीधा संपर्क होगा। भोपाल-कोटा की दूरी को 100 किमी तक कम होगी। इसका काम 2026 तक पूरा हो जाएगा।
लागत-7,474 करोड़ रुपए
लंबाई-205 किमी
यह लाइन इंदौर के मांगलिया से शुरू होकर बुधनी तक जाएगी। देवास के कमलापुर के पास प्रदेश की सबसे लंबी सुरंग 8.64 किलोमीटर भी इसी ट्रैक पर बनेगी। 2030 तक पूरी होगी।
लागत-495 करोड़ रुपए
लंबाई-48.5 किमी
यह ट्रैक नीमच (मप्र) से बड़ी सादड़ी (राजस्थान) के बीच बनेगा। इससे चित्तौड़गढ़ के बजाय मावली होकर उदयपुर जाना आसान होगा। वर्ष 2030 तक काम पूरा होगा। माल ढुलाई के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इस मार्ग पर औद्योगिक इकाइयां हैं।
लागत-18,529 करोड़ रुपए
लंबाई -309 किमी
यह लाइन धार, खरगोन और बड़वानी के माध्यम से इंदौर को महाराष्ट्र के धुले और नासिक से जोड़ेगी। इंदौर-मुंबई के बीच की दूरी कम होगी, जिससे मालवा क्षेत्र का विकास होगा। औद्योगिक विकास : पीथमपुर और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों को सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे धार, बड़वानी जैसे रेल-सुविधा से वंचित जिलों को सीधा लाभ होगा।