अच्छी खबर :मध्य प्रदेश में 3 साल में बनेंगी 5 नई रेल लाइनें, 10 लाख लोगों को मिलेगी सुविधा

मध्य प्रदेश में आने वाले वर्षों में रेल नेटवर्क और मजबूत हो जाएगा। आगामी दो से तीन साल में करीब 5 नए ट्रैक पर ट्रेन दौड़ने लगेंगी। इससे करीब 10 लाख लोगों को फायदा मिलेगा। इन रेल रूट के बनने से धार्मिक स्थलों की कनेक्टिविटी और बढ़ जाएगी।
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मध्य प्रदेश में 3 साल में बनेंगी 5 नई रेल लाइनें, 10 लाख लोगों को मिलेगी सुविधा
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    अशोक गौतम,भोपाल। मप्र में 1400 किलोमीटर से ज्यादा की पांच नई रेल लाइन डाली जा रही हैं। इनमें दो से तीन साल के अंदर ट्रेनें दौड़ने लगेगी। इसका फायदा दो दर्जन से अधिक जिलों की  तहसीलों के लाखों लोगों को होगा। इन रेल लाइनों के जरिए प्रदेश के महाकालेश्वर, त्रयंबकेश्वर, मैहर, शिर्डी धार्मिक स्थान रेल लाइन से जुड़ेंगे।

    औद्योगिक क्षेत्रों को भी कनेक्ट करेंगे ये रूट

    इसके साथ ही मुकुंदपुर जू, पन्ना, बांधवगढ़, रातापानी टाइगर रिजर्व और खजुराहो जैसे एतिहासिक स्थलों में भी रेल कनेक्टिविटी बढ़ेगी। इसके  अलावा ये लाइनें सिंगरौली, सीमेंट उद्योग सतना, रामगंज मंडी, पीथमपुर सहित औद्योगिक कॉरिडोर के रूप में काम करेंगी। इन रेल लाइनों को तैयार करने में रेल मंत्रालय ने 40 हजार करोड़ से अधिक राशि खर्च करेगा।

    लालितपुर से सिंगरौली

    लागत-8,914 करोड़ रुपए

    लंबाई -541 किमी

    यह परियोजना विंध्य को उत्तर-पूर्व से जोड़ने वाली विकास रेखा है, जिसका कार्य 2028 तक पूरी तरह से समाप्त करने का निर्देश दिया गया है। इससे सीध- सिंगरौली तक कनेक्टिविटी बढ़ेगी, औद्योगिक विकास होगा।

    रामगंजमंडी-भोपाल

    लागत-5,073 करोड़ रुपए

    लंबाई-276.5 किमी

    कोटा मंडल (राजस्थान) और भोपाल मंडल के बीच सीधा संपर्क होगा। भोपाल-कोटा की दूरी को 100 किमी तक कम होगी। इसका काम 2026 तक पूरा हो जाएगा।

     

    इंदौर- बुधनी  

    लागत-7,474 करोड़ रुपए

    लंबाई-205 किमी

    यह लाइन इंदौर के मांगलिया से शुरू होकर बुधनी तक जाएगी। देवास के कमलापुर के पास प्रदेश की सबसे लंबी सुरंग 8.64 किलोमीटर भी इसी ट्रैक पर बनेगी। 2030 तक पूरी होगी। 

    नीमच- बड़ी सादड़ी 

    लागत-495 करोड़ रुपए

    लंबाई-48.5 किमी

    यह ट्रैक नीमच (मप्र) से बड़ी सादड़ी (राजस्थान) के बीच बनेगा। इससे चित्तौड़गढ़ के बजाय मावली होकर उदयपुर जाना आसान होगा। वर्ष 2030 तक काम पूरा होगा। माल ढुलाई के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इस मार्ग पर औद्योगिक इकाइयां हैं।

    मनमाड़- इंदौर

    लागत-18,529 करोड़ रुपए

    लंबाई -309 किमी

    यह लाइन धार, खरगोन और बड़वानी के माध्यम से इंदौर को महाराष्ट्र के धुले और नासिक से जोड़ेगी। इंदौर-मुंबई के बीच की दूरी कम होगी, जिससे मालवा क्षेत्र का विकास होगा। औद्योगिक विकास : पीथमपुर और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों को सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे धार, बड़वानी जैसे रेल-सुविधा से वंचित जिलों को सीधा लाभ होगा। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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