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EPF vs FD:रिटायरमेंट के लिए कौन है बेहतर? जानिए कहां मिलेगा ज्यादा फायदा

रिटायरमेंट के लिए EPF और FD में से किसे चुनना है यह सवाल अक्सर निवेशकों को परेशान करता है। भविष्य की ज़रूरतों के लिए किसमें ज़्यादा फायदा मिलेगा और कौन सा निवेश आपके लिए सबसे उपयुक्त है।
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रिटायरमेंट के लिए कौन है बेहतर? जानिए कहां मिलेगा ज्यादा फायदा
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बचत और निवेश की बात आते ही ज्यादातर लोगों के मन में एक सवाल जरूर आता है कि पैसा EPF यानी कर्मचारी भविष्य निधि में रखना बेहतर है या फिर बैंक FD में निवेश करना चाहिए। पहली नजर में FD ज्यादा आसान और फ्लेक्सिबल विकल्प लगती है क्योंकि इसमें निवेशक अपने पैसे को जरूरत के हिसाब से जमा और निकाल सकता है। लेकिन अगर लंबी अवधि की बचत, रिटायरमेंट प्लानिंग और टैक्स फायदे की बात करें तो EPF कई मामलों में FD से आगे नजर आता है।

EPF सबसे ज्यादा मजबूत विकल्प

EPF खासतौर पर नौकरीपेशा लोगों की रिटायरमेंट सुरक्षा के लिए बनाई गई स्कीम है। इसमें कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 12 फीसदी हिस्सा जमा होता है और उतना ही योगदान कंपनी यानी एंप्लॉयर भी देता है। यही सबसे बड़ा फायदा है, क्योंकि FD में सिर्फ निवेशक ही पैसा जमा करता है। यानी EPF में आपकी बचत दोगुनी रफ्तार से बढ़ती है। लंबे समय तक नौकरी के दौरान यह एक बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार करने में मदद करता है।

ब्याज दर में भी EPF आगे

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए EPF पर 8.25 फीसदी ब्याज दर बरकरार रखी गई है। वहीं ज्यादातर बैंक FD पर करीब 6 से 8 फीसदी तक ब्याज दे रहे हैं। हालांकि FD की दरें बैंक और अवधि के हिसाब से बदलती रहती हैं। EPF का एक और बड़ा फायदा कंपाउंडिंग है। 20 से 30 साल तक लगातार जमा होने वाला पैसा ब्याज के साथ तेजी से बढ़ता है। जबकि FD में बार-बार मैच्योरिटी और रिन्यूअल की वजह से लंबी अवधि में फंड ग्रोथ सीमित हो सकती है।

टैक्स बचत में भी EPF का फायदा

EPF का सबसे बड़ा आकर्षण इसका टैक्स बेनिफिट है। तय नियमों के तहत EPF में जमा राशि, उस पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाला पैसा तीनों टैक्स फ्री हो सकते हैं। इसके उलट FD पर मिलने वाला ब्याज आपकी कुल आय में जुड़ता है और टैक्स स्लैब के हिसाब से उस पर टैक्स देना पड़ता है। यानी समान ब्याज दर होने पर भी टैक्स कटने के बाद FD का वास्तविक रिटर्न कम हो सकता है।

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EPF में पेंशन और बीमा जैसी सुविधाएं भी

EPF सिर्फ सेविंग स्कीम नहीं है, बल्कि यह एक सोशल सिक्योरिटी सिस्टम भी है। इसका संचालन EPFO करता है, जो श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तहत काम करता है। EPF खाताधारकों को रिटायरमेंट सेविंग के साथ कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) और बीमा जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं। जबकि FD सिर्फ गारंटीड रिटर्न देने वाला बैंकिंग प्रोडक्ट है जिसमें अतिरिक्त सोशल सिक्योरिटी का फायदा नहीं मिलता।

निकासी के नियमों में बड़ा अंतर

FD को जरूरत पड़ने पर समय से पहले तोड़ा जा सकता है हालांकि इसके लिए पेनल्टी और कम ब्याज का नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं EPF का मकसद लंबी अवधि की बचत को बढ़ावा देना है। हालांकि घर खरीदने, इलाज, शादी या शिक्षा जैसी जरूरतों के लिए आंशिक निकासी की सुविधा दी जाती है।

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आखिर किसे चुनें?

अगर आपका लक्ष्य शॉर्ट टर्म सेविंग या इमरजेंसी फंड तैयार करना है तो FD अच्छा विकल्प हो सकता है। लेकिन अगर बात रिटायरमेंट प्लानिंग, टैक्स बचत और लंबे समय में बड़ा फंड बनाने की हो, तो EPF ज्यादा मजबूत और फायदेमंद विकल्प माना जाता है।

Sumit Shrivastava
By Sumit Shrivastava

मास कम्युनिकेशन में Ph.D और M.Phil पूर्ण की है तथा टीवी और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते ...Read More

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