सस्ता तेल, कम महंगाई और मजबूत रुपया…ट्रंप की डील से भारत की बल्ले-बल्ले! क्या अब सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल और LPG?

नई दिल्ली। करीब साढ़े तीन महीने तक चले तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के बाद अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते ने पूरी दुनिया को राहत दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते की घोषणा करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने और नौसैनिक नाकेबंदी हटाने का ऐलान किया है।
इस घोषणा का असर तुरंत वैश्विक तेल बाजार में दिखाई दिया। ब्रेंट क्रूड करीब 4 फीसदी गिरकर 84 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 81 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गया। जानिए भारत को इससे क्या फायदा होगा, पेट्रोल-डीजल, LPG, महंगाई, आयात बिल और चाबहार पोर्ट पर इसका क्या असर पड़ेगा।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर इस्तेमाल होने वाले करीब 20 फीसदी कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद इस मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हुई थी। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई और तेल की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर पहुंच गई थीं। युद्ध के चरम पर ब्रेंट क्रूड 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। अब इस मार्ग के दोबारा खुलने से तेल और गैस की सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है।
भारत के लिए क्यों है बड़ी खबर?
भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में शामिल है। देश अपनी जरूरत का 85 से 88 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इनमें सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और अन्य खाड़ी देशों की बड़ी हिस्सेदारी है। भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा होर्मुज के रास्ते पूरा होता है।
भारत की निर्भरता
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क्षेत्र |
होर्मुज पर निर्भरता |
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कच्चा तेल |
35-40% आयात |
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एलपीजी |
लगभग 90% |
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प्राकृतिक गैस (LNG) |
50-65% |
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कुल तेल आयात |
85-88% |
पेट्रोल-डीजल के दाम हो सकते हैं कम
युद्ध के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था, जिसका असर भारत में ईंधन की कीमतों पर भी पड़ा। कई जगह पेट्रोल और डीजल के दामों में 7 से 8.5 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखी गई। अब जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है, तो तेल कंपनियों पर कीमतें घटाने का दबाव बढ़ सकता है।
अगर कच्चा तेल लंबे समय तक मौजूदा स्तर पर बना रहता है तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 से 5 रुपए प्रति लीटर तक राहत मिल सकती है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
LPG और CNG पर भी दिख सकता है असर
युद्ध के दौरान गैस सप्लाई प्रभावित होने से रसोई गैस और CNG की लागत बढ़ गई थी। कई इलाकों में LPG सिलेंडर की रीफिलिंग में देरी होने लगी थी, जबकि कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में भी भारी उछाल आया था। होर्मुज खुलने और गैस सप्लाई सामान्य होने से आने वाले समय में LPG और CNG की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
महंगाई पर लगेगा ब्रेक?
तेल सिर्फ वाहनों में इस्तेमाल होने वाला ईंधन नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। जब तेल महंगा होता है तो-
- माल ढुलाई महंगी होती है।
- खाद्य वस्तुओं की कीमत बढ़ती है।
- निर्माण लागत बढ़ती है।
- उद्योगों का खर्च बढ़ता है।
तेल सस्ता होने से परिवहन लागत घट सकती है, जिससे फल-सब्जियां, राशन, सीमेंट और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
भारत का आयात बिल होगा कम
युद्ध के दौरान भारत का तेल आयात बिल तेजी से बढ़ा था। पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) के अनुसार अप्रैल में भारत का तेल आयात बिल 16.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। तेल की कीमतों में गिरावट और सप्लाई सामान्य होने से-
- आयात बिल कम होगा।
- विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटेगा।
- रुपए को मजबूती मिल सकती है।
- राजकोषीय घाटे पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
चाबहार पोर्ट को मिल सकती है नई रफ्तार
अमेरिका और ईरान के रिश्तों में नरमी का असर भारत के रणनीतिक चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट पर भी पड़ सकता है। भारत ने ईरान के चाबहार बंदरगाह में बड़ा निवेश किया है। यह प्रोजेक्ट भारत को पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच प्रदान करता है। अगर प्रतिबंधों में ढील मिलती है तो-
- चाबहार पोर्ट का विस्तार आसान होगा।
- व्यापार बढ़ेगा।
- नए निवेश की राह खुलेगी।
- INSTC (International North-South Transport Corridor) को गति मिलेगी।
किन सेक्टरों को सबसे ज्यादा फायदा?
तेल की कीमतों में गिरावट से कई उद्योगों को सीधा लाभ मिल सकता है।
प्रमुख लाभार्थी सेक्टर
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सेक्टर |
संभावित फायदा |
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एयरलाइंस |
ईंधन लागत कम होगी |
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लॉजिस्टिक्स |
माल ढुलाई सस्ती होगी |
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ऑटोमोबाइल |
मांग बढ़ सकती है |
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पेट्रोकेमिकल |
उत्पादन लागत घटेगी |
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उर्वरक उद्योग |
कच्चे माल की लागत कम होगी |
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गैस आधारित उद्योग |
सप्लाई सामान्य होगी |
भारतीय नाविकों और प्रवासियों को राहत
युद्ध के दौरान खाड़ी क्षेत्र में कई भारतीय जहाजों और नाविकों पर खतरा बढ़ गया था। वहीं मध्य पूर्व के देशों में रहने वाले लाखों भारतीय भी तनाव के माहौल में थे। शांति समझौते के बाद-
- समुद्री सुरक्षा बेहतर होगी।
- भारतीय नाविकों को राहत मिलेगी।
- खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों के लिए जोखिम कम होगा।
- व्यापारिक गतिविधियां सामान्य होने लगेंगी।











