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चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था, चुनाव पर निर्णय लेना उसका विशेषाधिकार

तीसरी लहर की आशंका को मद्देनजर उपचुनाव रोके जाने को लेकर दायर मामले का पटाक्षेप
जबलपुर। प्रदेश में 1 लोकसभा व 3 विधानसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव को रोके जाने की मांग करते हुए दायर मामले का हाईकोर्ट ने पटाक्षेप कर दिया। चीफ जस्टिस मो. रफीक व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ के समक्ष चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि उपचुनाव का अभी कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है, इसलिए उक्त याचिका का कोई औचित्य नहीं है। इतना ही नहीं संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव कब कराना कब नहीं, इसका फैसला चुनाव आयोग करेगा क्योंकि वह एक संवैधानिक संस्था है। कोरोना गाइड लाइन को लेकर पूर्व में ही चुनाव आयोग दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। उक्त जवाब के बाद न्यायालय ने दायर याचिका खारिज कर दी, हालांकि विस्तृत आदेश फिलहाल प्रतीक्षित है। उल्लेखनीय है कि यह जनहित याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे व रजत भार्गव की ओर से दायर की गई है। जिसमें  प्रदेश की 1 लोकसभा व 3 विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव कराए जाने को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि राज्य चुनाव आयोग की ओर से हाईकोर्ट में अंडरटेकिंग दी थी कि प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव का आयोजन कोरोना की तीसरी लहर समाप्त होने कर कराए जाएंगे।

ये दिया गया तर्क

प्रदेश के स्वास्थ्य संचालनालय द्वारा 31 जुलाई 2021 जारी रिपोर्ट के अनुसार कोरोना का डेल्टा वैरिएंट 33 प्रतिशत तक पाया गया है, जिसके संक्रमण फैलाने की ताकत ज्यादा होती है। प्रदेश के 27 जिलों में डेल्टा वैरिंएट फैल चुका है। ऐसे में आगामी उपचुनाव कोरोना के सुपर स्प्रेडर बन सकते हैं, अत: उपचुनावों को फिलहाल रोका जाए। याचिका में दमोह उपचुनाव का उल्लेख करते हुए कहा गया कि वहां पर संपन्न हुए उपचुनाव के कारण करीब 1 हजार लोगों ने अपनी जान गंवाई है।  मामले में बुधवार को सुनवाई के दौरान आवेदक की ओर से केरल सहित अन्य स्थानों का उदाहरण देते हुए कहा गया कि कोरोना के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं जो कि तीसरी लहर की आहट है, ऐसे में चुनाव कराना घातक होगा। चुनाव आयोग की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ ने पक्ष रखा।
Piyush Singh Rajput
By Piyush Singh Rajput

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