ग्वालियर। यह घटना सिर्फ जमीन के हस्तांतरण की कहानी नहीं, बल्कि भरोसे और इंसानियत की मिसाल है। 35 साल पुराने वचन को निभाकर एक बुजुर्ग ने यह साबित कर दिया कि सच्चाई और ईमानदारी आज भी जिंदा है।
ग्राम गुर्री भादावना के रहने वाले शालिग्राम पंडा ने वर्षों पहले गांव के ही अशोक कुमार वाल्मीकि से एक वादा किया था। उस समय अशोक आर्थिक रूप से कमजोर थे और उनके पास खेती के लिए खुद की जमीन नहीं थी। ऐसे में शालिग्राम ने उन्हें अपनी जमीन पर खेती करने दी और भरोसा दिलाया कि एक दिन यह जमीन उनकी ही हो जाएगी। समय बीतता गया, लेकिन इस वादे की सच्चाई कभी कम नहीं हुई।
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करीब 35 साल बाद, 31 मार्च 2026 को शालिग्राम पंडा ने अपने वचन को पूरा करते हुए जमीन की रजिस्ट्री अशोक के नाम कर दी। आज इस जमीन की कीमत लाखों में आंकी जा रही है, लेकिन उन्होंने पुराने वादे के मुताबिक ही सौदा पूरा किया। अशोक ने मात्र 20 हजार रुपए देकर जमीन अपने नाम करवाई।
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शालिग्राम पंडा ने बताया कि बढ़ती उम्र को देखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद न हो। उनके इस निर्णय में परिवार ने भी पूरा समर्थन दिया। उनके नाती प्रबल पंडा ने भी उन्हें वादा निभाने के लिए। वहीं अशोक वाल्मीकि ने इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा उपहार बताया और कहा कि आज भी ऐसे लोग हैं जो सच्चाई को सबसे ऊपर रखते हैं।