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CBSE में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल :चेयरमैन और सचिव हटाए गए, OSM विवाद की होगी जांच

CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) टेंडर प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को पद से हटा दिया है। मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है, जो टेंडर नियमों में कथित बदलाव और अनियमितताओं की जांच करेगी।
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चेयरमैन और सचिव हटाए गए, OSM विवाद की होगी जांच

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटा दिया है। इसके साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है।

OSM विवाद के बाद सरकार का बड़ा फैसला

पिछले कुछ समय से CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली के लिए निकाले गए टेंडर को लेकर विवाद चल रहा था। टेंडर प्रक्रिया में कथित बदलावों और कुछ कंपनियों को लाभ पहुंचाने के आरोपों के कारण मामला चर्चा में था। विवाद बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की।

जांच के लिए बनाई गई उच्च स्तरीय समिति

सरकार ने पूरे खरीद (Procurement) और टेंडर प्रक्रिया की जांच के लिए एक जांच समिति गठित की है। इस समिति की अध्यक्षता क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान करेंगी। समिति को जरूरत पड़ने पर अन्य विभागों और कार्यालयों के अधिकारियों की सहायता लेने का अधिकार दिया गया है। वहीं, क्षमता निर्माण आयोग समिति को सचिवालयी सहायता उपलब्ध कराएगा। समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को सौंपनी होगी।

राहुल सिंह को मिला था कार्यकाल विस्तार

राहुल सिंह 1996 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्हें अगस्त 2025 में दो साल का सेवा विस्तार दिया गया था और उनका कार्यकाल नवंबर 2027 तक निर्धारित था। हालांकि OSM विवाद के बीच उन्हें समय से पहले पद से हटा दिया गया।

क्या है OSM टेंडर विवाद?

CBSE ने डिजिटल मूल्यांकन यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग के लिए पिछले वर्ष टेंडर जारी किया था। यह टेंडर दो बार रद्द किया गया। तीसरी बार टेंडर प्रक्रिया में तीन कंपनियों ने हिस्सा लिया। इनमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), रैंकगुरु टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस और कोएम्प्ट एडुटेक (Coempt Edu Tech) शामिल थीं।

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टेंडर नियमों में बदलाव के आरोप

रांची के छात्र सार्थक सिद्धांत ने आरोप लगाया कि दो बार टेंडर रद्द होने के बाद नियमों में बदलाव किए गए। आरोप के अनुसार, कंपनियों के लिए तीन साल के औसत टर्नओवर की शर्त लगभग 50 करोड़ रुपये रखी गई, जिससे कुछ विशेष कंपनियों को फायदा पहुंचा। शिकायत में कहा गया कि Coempt Edu Tech का औसत टर्नओवर बहुत मामूली अंतर से इस पात्रता सीमा को पूरा कर रहा था, जबकि अन्य बड़ी कंपनियां पहले से ही पात्र थीं।

ब्लैकलिस्टिंग और पात्रता शर्तों पर भी सवाल

एक अन्य आरोप यह है कि टेंडर की शर्तों में बदलाव कर ‘Previously Blacklisted’ की जगह ‘Blacklisted Earlier’ जैसे शब्द जोड़े गए। शिकायतकर्ता का दावा है कि इससे Coempt Edu Tech को लाभ मिला, जिसका पुराना नाम Globarena था और जिसे वर्ष 2019 में तेलंगाना शिक्षा बोर्ड ने ब्लैकलिस्ट किया था।

तकनीकी मानकों में भी बदलाव का आरोप

शिकायत में यह भी कहा गया कि CMMI (Capability Maturity Model Integration) स्तर की अनिवार्यता को स्तर-5 से घटाकर स्तर-3 कर दिया गया। इसके अलावा पहले कंपनियों के पास स्वयं का डेटा सेंटर और डिजास्टर रिकवरी सेंटर होना जरूरी था, लेकिन बाद में नियम बदलकर AWS, Azure या Google Cloud जैसी थर्ड पार्टी सेवाओं के उपयोग की अनुमति दे दी गई।

जांच रिपोर्ट का इंतजार

विवाद लगातार बढ़ने और टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद केंद्र सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। अब गठित समिति पूरे मामले की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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