स्पेस साइंस में बड़ी छलांग!VIT भोपाल में NARL का हाईटेक GNSS रिसीवर स्थापित, अंतरिक्ष मौसम और स्पेस रिसर्च को मिलेगी नई रफ्तार

सीहोर। मध्यप्रदेश के सीहोर जिले स्थित वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी ने अंतरिक्ष विज्ञान और आधुनिक अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय वायुमंडलीय अनुसंधान प्रयोगशाला (NARL) ने विश्वविद्यालय परिसर में अत्याधुनिक GNSS (Global Navigation Satellite System) रिसीवर स्थापित किया है। यह हाईटेक प्रणाली आयनोस्फीयर, स्पेस वेदर और उपग्रह आधारित नेविगेशन से जुड़े महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आंकड़ों की लगातार निगरानी करेगी। इससे विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक अनुसंधान नेटवर्क से जुड़ गया है और भविष्य में अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े शोध कार्यों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय वैज्ञानिक परियोजना से जुड़ा VIT भोपाल
वीआईटी भोपाल अब NARL की महत्वाकांक्षी परियोजना "नॉर्थ-साउथ चेन फॉर आयनोस्फीयर एंड स्पेस वेदर ऑब्जर्वेशन" का हिस्सा बन गया है। इस परियोजना के तहत देशभर में अत्याधुनिक GNSS रिसीवर स्थापित किए जा रहे हैं, जो पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में होने वाले परिवर्तनों और अंतरिक्ष मौसम की निरंतर निगरानी करते हैं। इस नेटवर्क से जुड़ने के बाद वीआईटी भोपाल देश के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों के साथ अनुसंधान गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाएगा।
आयनोस्फीयर और स्पेस वेदर की होगी सटीक निगरानी
विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. प्रदीप एस. चौहान के अनुसार यह GNSS रिसीवर आयनोस्फीयर से जुड़े कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक मानकों का 24 घंटे विश्लेषण करेगा। इसमें टोटल इलेक्ट्रॉन कंटेंट (TEC), आयनोस्फेरिक सिंटिलेशन, सिग्नल डिग्रेडेशन, लॉस ऑफ लॉक और भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में होने वाली वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का अध्ययन शामिल है। इसके अलावा सौर गतिविधियों और भू-चुंबकीय प्रभावों से उत्पन्न ट्रैवलिंग आयनोस्फेरिक डिस्टर्बेंस का भी सटीक विश्लेषण किया जा सकेगा।
नेविगेशन और सैटेलाइट तकनीक को मिलेगा फायदा
इस रिसीवर से प्राप्त डेटा उपग्रह आधारित नेविगेशन, पोजिशनिंग, टाइमिंग और भूगणित जैसे क्षेत्रों में बेहद उपयोगी साबित होगा। वैज्ञानिक इस डेटा की मदद से GPS और अन्य सैटेलाइट आधारित सेवाओं की सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ाने के साथ-साथ संचार प्रणालियों को बेहतर बनाने तथा अंतरिक्ष मौसम के प्रभावों का पूर्वानुमान लगाने में सक्षम होंगे। इससे भविष्य की उपग्रह तकनीकों को और अधिक सुरक्षित एवं प्रभावी बनाया जा सकेगा।
शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए सुनहरा अवसर
GNSS रिसीवर की स्थापना से विश्वविद्यालय के शोधार्थियों, वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों को वास्तविक वैज्ञानिक डेटा पर कार्य करने का अवसर मिलेगा। अब स्पेस साइंस, आयनोस्फेरिक रिसर्च, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और स्वदेशी नेविगेशन तकनीकों पर उच्च स्तरीय शोध को नई गति मिलेगी। साथ ही राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोगात्मक अनुसंधान परियोजनाओं के नए अवसर भी विकसित होंगे।
क्या है GNSS रिसीवर?
GNSS (Global Navigation Satellite System) एक अत्याधुनिक रिसीवर प्रणाली है, जो विभिन्न नेविगेशन उपग्रहों से प्राप्त सिग्नलों का विश्लेषण कर किसी स्थान की सटीक स्थिति, समय और ऊंचाई का निर्धारण करती है। वैज्ञानिक अनुसंधान में इसका उपयोग आयनोस्फीयर की 24×7 निगरानी, स्पेस वेदर का अध्ययन, नेविगेशन की सटीकता बढ़ाने और उपग्रह संचार प्रणालियों पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण करने के लिए किया जाता है।
भारत की वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता को मिलेगा नया बल
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरिक्ष मौसम का सीधा प्रभाव उपग्रह संचार, विमानन, रक्षा, मौसम पूर्वानुमान और नेविगेशन सेवाओं पर पड़ता है। ऐसे में वीआईटी भोपाल में स्थापित यह अत्याधुनिक GNSS रिसीवर केवल एक शोध उपकरण नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक क्षमता और आत्मनिर्भर अंतरिक्ष अनुसंधान मिशन को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम है। विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि यह सुविधा विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर के वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़ते हुए भविष्य के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।












