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ED भोपाल ने श्रीकांत भासी की 51 करोड़ की दुबई स्थित संपत्ति कुर्क की  

बैंक से धोखाधड़ी के मामले में एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) के भोपाल जोनल कार्यलय ने श्रीकांत भासी की 51.90 करोड़ रुपए की दुबई स्थित संपत्ति कुर्क की है। 
ED भोपाल ने श्रीकांत भासी की 51 करोड़ की दुबई स्थित संपत्ति कुर्क की  
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल। ED की भोपाल जोनल यूनिट ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के प्रावधानों के तहत श्रीकांत भासी की दुबई (यूएई) में स्थित नौ आलीशान संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। ये संपत्तियां भासी ने अपनी बेटी को गिफ्ट की थीं। कुर्क की गई संपत्तियां अपार्टमेंट और वाणिज्यिक स्थानों के रूप में हैं, जिनकी कीमत 51.70 करोड़ रुपए है। उक्त कुर्की मेसर्स एडवांटेज ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड (AOPL) द्वारा किए गए बैंक धोखाधड़ी के मामले में की गई है। इसके निदेशकों, गारंटरों और इसके मुख्य निदेशक-महत्वपूर्ण लाभार्थी मालिक, श्रीकांत भासी सहित संबंधित व्यक्तियों ने भारतीय स्टेट बैंक को 1266.63 करोड़ रुपए का गलत नुकसान पहुंचाया। 

    तीन महीने पहले मारा था छापा

    ED की भोपाल यूनिट ने तीन और चार अगस्त 2025 को AOPL के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत छापे मारे थे। ED की टीमों ने मानसरोवर कॉम्पलेक्स स्थित कंपनी के दफ्तर के अलावा निदेशकों से जुड़े आधा दर्जन ठिकानों पर भी तलाशी ली थी। छापे के दौरान जांच करने पहुंची टीम को कई अहम सबूत मिले थे। इसमें कर्मचारियों और कई बेनामीदारों के नाम पर बनाई शैल कंपनियां, अपराध की आय छुपाने के लिए संदिग्ध ट्रांजेक्शन और महंगी प्रॉपर्टी की खरीद भी शामिल थीं। ईडी ने ये छापे सीबीआई की बीएसएफसी यूनिट द्वारा आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर मारे थे। इस एफआईआर के अनुसार एओपीएल के निदेशकों ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जाली दस्तावेजों के जरिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को 1266.63 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया था। 

    100 गुना बढ़ाकर दिखाया था प्रॉफिट

    ED को छापे के दौरान मिले दस्तावेजो में खुलासा हुआ था कि AOPL ने बैंक से अनुचित लाभ लेने के लिए अपने कारोबार को कागजों पर 100 गुना बढ़ाकर दिखाया था। कंपनी ने बैंक से मिले लोन को 73 अलग-अलग संस्थाओं के जरिए अपनी और अपनी सहयोगी कंपनियों में ट्रांसफर किए थे। मनी ट्रांजेक्शन के बाद AOPL ने खुद को एनपीए घोषित कर दिया था, जिसके बाद एसबीआई ने एनसीएलटी में आवेदन के साथ सीबीआई को शिकायत भी की थी। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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