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बदला मनोरंजन का अर्थशास्त्र, अब बड़े स्टूडियोज को भी चाहिए कॉर्पोरेट निवेश

बदला मनोरंजन का अर्थशास्त्र, अब बड़े स्टूडियोज को भी चाहिए कॉर्पोरेट निवेश

अनिरुद्ध प्रताप सिंह-भोपाल। फिल्म निर्माता करण जौहर ने पिछले दिनों अपने स्टूडियो धर्मा प्रोडक्शन्स के 50 फीसदी शेयर सीरम इंस्टीट्यूट के अदार पूनावाला को बेच दिए। पहली नजर में, किसी वैक्सीन निर्माता द्वारा भारतीय फिल्म निर्माण कंपनी में हिस्सेदारी खरीदना अप्रत्याशित और विचित्र लग सकता है, लेकिन हाल के दिनों में बॉलीवुड के फिल्म निर्माता, दक्षिण की फिल्मों की वजह से जिस तरह की वित्तीय असुरक्षा से घिर गए हैं, उसने इन्हें कंटेंट और निर्देशन के साथ-साथ प्रचार-प्रसार को ज्यादा गंभीरता से लेने पर विवश कर दिया है। हाल के दिनों में बड़े स्टूडियोज को हिंदी फिल्मों पर किए गए निवेश से पर्याप्त रिटर्न मिलना मुश्किल हो गया है।

अदार पूनावाला ने इस सौदे में 1000 करोड़ खर्च किए हैं, जो 2021 के बाद से फार्मास्यूटिकल्स के बाहर उनका पहला अहम निवेश है। फिल्म निर्माण का अर्थशास्त्र अब बदल गया है। स्टूडियोज को फिल्मों और शोज के के लिए अब पहले से अधिक पूंजी की जरूरत पड़ने लगी है, क्योंकि उनको सिनेमाघरों के अलावा स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स और टेलीविजन पर भी प्रदर्शन करना होता है। धर्मा प्रोडक्शंस और पूनावाला के बीच यह सौदा दिखाता है कि अब स्टूडियोज मालिक ज्यादा धन के लिए कॉर्पोरेट निवेश को एक अहम् उपाय के रूप में देख रहे हैं।

पूनावाला ने महामारी के दौरान वैक्सीन बिक्री से काफी मुनाफा कमाया है। अब वह इस निवेश के माध्यम से बॉलीवुड में जगह बनाने का प्रयास कर रहे हैं। अदार पूनावाला की पत्नी की बॉलीवुड के शीर्ष सितारों के साथ निकटता है। इस निवेश के माध्यम से अदार ने पत्नी की फिल्म से जुड़ी महत्वाकांक्षाओं के लिए एक नया रास्ता खोल दिया है। उधर, धर्मा प्रोडक्शन्स के लिए यह एक स्ट्रेटेजिक निवेश है, न कि पूर्ण अधिग्रहण। इससे धर्मा प्रोडक्शन्स की स्वायत्तता और रचनात्मक नियंत्रण पर कोई असर नहीं पड़ेगा। वैश्विक स्तर पर मीडिया और मनोरंजन उद्योग में भी एकीकरण देखा जा रहा है।

भारत में रिलायंसडि ज्नी और पीवीआर-आइनॉक्स जैसे कई उदाहरण हैं। इसके साथ ही नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम जैसे स्ट्रीमिंग दिग्गज, स्टूडियो द्वारा निर्मित कंटेंट के बड़े खरीदार बनकर उभरे हैं। करण जौहर ने भी स्वीकार किया है कि वर्तमान में हिंदी फिल्म उद्योग अपने सबसे निचले स्तर पर जा पहुंचा है, जहां नियमित रिलीज और वितरण चैनलों में घटते राजस्व की समस्या पैदा हो गई है। धर्मा प्रोडक्शन्स की आय वित्त वर्ष 2023 में 1040 करोड़ से घटकर वित्त वर्ष 2024 में 512.2 करोड़ रह गई है।

इसका मुख्य कारण फिल्म वितरण और प्रदर्शनों में गिरावट, उपग्रह अधिकारों में कमी और डिजिटल से बढ़ती आय रही है। इस दौरान यशराज फिल्म्स ने तुलनात्मक रूप से अच्छा प्रदर्शन किया। जिसकी वजह से वर्ष 2023 में ‘पठान’ जैसी फिल्मों की सफलता की वजह से 1500 करोड़ से अधिक की आय हुई। हालांकि, वित्त वर्ष 2024 के तीसरे तिमाही तक उनकी कुल आय लगभग 600 करोड़ रही और वित्त वर्ष के अंत तक इसका अनुमान 700-750 करोड़ तक ही है। स्टूडियो के ये अस्थिर आंकड़े इस व्यवसाय की अनिश्चितता को दिखाते हैं। पिछले साल बॉक्स ऑफिस पर चार फिल्मों ने 500 करोड़ से अधिक की कमाई की थी, जिससे महामारी के बाद उद्योग को नए सिरे से प्रोत्साहन मिला।

इस साल केवल एक ही फिल्म 500 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर सकी है। यहां तक कि 2023 जैसे अच्छे साल में भी उच्च टिकट कीमतों ने सहारा दिया, लेकिन सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्या में कमी देखने को मिली। आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल बड़े पर्दे पर मास एस्केपिज्म (यानी ज्यादा मसाला या मनोरंजक कंटेंट) दर्शकों को खूब पसंद आया और अधिकांश प्रोडक्शन हाउस इसी तरह की फॉर्मूला फिल्मों के बढ़ने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन एक साल बाद, यह स्पष्ट है कि पुरानी कहानियों को नई शैली में परोसना हमेशा सफलता की गारंटी नहीं होता है। इसलिए, ऐसे समय में जब स्टूडियोज अपनी रणनीति बदलते हुए कॉर्पोरेट पूंजी की ओर मुड़ रहे हैं तो उन्हें लेखन और निर्देशन की प्रतिभाओं पर भी निवेश करना चाहिए।

People's Reporter
By People's Reporter

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