भवानीपुर। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के नामांकन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रोड शो के दौरान हुए हंगामे के बाद चुनाव आयोग ने सख्त कदम उठाया है। आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था में कथित लापरवाही को गंभीर मानते हुए कोलकाता पुलिस के चार अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश दिया है।
इस कार्रवाई में एक डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। चुनाव आयोग ने न केवल इन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने का निर्देश दिया है, बल्कि उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने को भी कहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति और चुनावी माहौल को और गरमा दिया है।
चुनाव आयोग के निर्देश के बाद जिन चार पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया गया है, उनमें वरिष्ठ स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। इन अधिकारियों के नाम इस प्रकार हैं:
चुनाव आयोग का कहना है कि, इन अधिकारियों की जिम्मेदारी उस क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की थी, जहां यह पूरा घटनाक्रम हुआ। लेकिन रोड शो के दौरान स्थिति नियंत्रण से बाहर चली गई, जिसे आयोग ने गंभीर सुरक्षा चूक माना।
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दरअसल, भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी भवानीपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। 2 अप्रैल को वे इस सीट से अपना नामांकन दाखिल करने पहुंचे थे।
नामांकन से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में एक बड़ा रोड शो आयोजित किया गया था। यह रोड शो दक्षिण कोलकाता के हाजरा मोड़ से शुरू होकर अलीपुर सर्वे बिल्डिंग तक गया, जहां सुवेंदु अधिकारी को अपना नामांकन पत्र दाखिल करना था। लेकिन जैसे ही यह काफिला कालीघाट इलाके में पहुंचा, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का घर भी स्थित है, माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया।
रिपोर्ट के अनुसार, जैसे ही अमित शाह का काफिला कालीघाट इलाके से गुजरा, वहां मौजूद तृणमूल कांग्रेस (TMC) समर्थकों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसके जवाब में भाजपा समर्थकों ने भी विरोध जताया। धीरे-धीरे यह नारेबाजी तीखी बहस में बदली और फिर हाथापाई की स्थिति पैदा हो गई। मौके पर मौजूद पुलिस बल को हालात संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
इस घटना ने चुनावी माहौल में अचानक तनाव बढ़ा दिया। आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे।
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घटना की जानकारी मिलने के बाद चुनाव आयोग ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया। आयोग ने कोलकाता पुलिस और राज्य प्रशासन से रिपोर्ट मांगी और पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की। इसके बाद आयोग ने पाया कि सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण में कई स्तर पर लापरवाही हुई थी। इसी के आधार पर आयोग ने चार पुलिस अधिकारियों को निलंबित करने का फैसला लिया।
चुनाव आयोग के सचिव सुजीत कुमार मिश्रा ने इस संबंध में पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला को पत्र भेजा। पत्र में स्पष्ट कहा गया कि इन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए।
चुनाव आयोग ने राज्य प्रशासन को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि, इस आदेश का तुरंत पालन किया जाए। आयोग ने यह भी कहा कि निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़ी अनुपालन रिपोर्ट 5 अप्रैल 2026 को सुबह 11 बजे तक आयोग को भेजी जाए। इसके अलावा, आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि जिन पदों पर ये अधिकारी कार्यरत थे, उन पदों को भरने के लिए तुरंत नया प्रस्ताव भेजा जाए।
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बताया जा रहा है कि, इस मामले को लेकर पहले ही कोलकाता पुलिस के भीतर हलचल शुरू हो गई थी। घटना के बाद पुलिस ने सिद्धार्थ दत्ता और रिजर्व फोर्स के डिप्टी कमिश्नर मानस रॉय को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। हालांकि, बाद में चुनाव आयोग ने सीधे कार्रवाई करते हुए चार अधिकारियों को निलंबित करने का निर्देश दिया।
जानकारी के अनुसार, इस घटना को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी नाराजगी देखी गई। हाल ही में पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ एक वर्चुअल बैठक हुई थी। इस बैठक में नव नियुक्त कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय नंद को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने पूछा कि जब इतने बड़े राजनीतिक कार्यक्रम की जानकारी पहले से थी, तो पुलिस ने पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं की।
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इस पूरे मामले में पुलिस ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है। दक्षिण कोलकाता के दो अलग-अलग पुलिस थानों में दर्ज शिकायतों के आधार पर तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। पुलिस ने घटना के दौरान लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली है। फुटेज के आधार पर करीब 35 से 40 लोगों की पहचान की गई है। इन लोगों को नोटिस भेजे गए हैं और उनसे पूछताछ की जा रही है।
भवानीपुर सीट पश्चिम बंगाल की राजनीति में बेहद अहम मानी जाती है। यह क्षेत्र मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ माना जाता है। ऐसे में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी का यहां से चुनाव लड़ना पहले से ही राजनीतिक रूप से बेहद चर्चित रहा है। अमित शाह की मौजूदगी में रोड शो और उसके दौरान हुआ हंगामा इस सीट को और ज्यादा सुर्खियों में ले आया है।