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E 20 Petrol :नई गाड़ियों में दिक्कत नहीं, पुरानी गाड़ियों के माइलेज, पार्ट्स और परफॉर्मेंस पर पड़ सकता है असर

देशभर में एक अप्रैल से ई-20 यानि 20 प्रतिशत इथेनॉल युक्त पेट्रोल की बिक्री से लोगों में जिज्ञासा है कि इसका गाड़ियों के इंजन पर क्या असर पड़ेगा। पीपुल्स समाचार ने लोगों की चिंता के समाधान के लिए एक्सपर्ट्र्स से बात की। उन्होंने बताया कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से एकदम से पुरानी गाड़ियों पर भी तत्काल कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। 
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नई गाड़ियों में दिक्कत नहीं, पुरानी गाड़ियों के माइलेज, पार्ट्स और परफॉर्मेंस पर पड़ सकता है असर
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। देशभर में 1 अप्रैल 2026 से ई -20 (20 प्रतिशत इथेनॉल युक्त) पेट्रोल अनिवार्य होने के बाद अब शहर में भी कुछ जगहों पर ई 20 पेट्रोल की सप्लाई शुरू हो गई है। कुछ ही दिन में शहर के हर पेट्रोल पंप पर ई-20 पेट्रोल ही मिलेगा। सरकार इसे पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा कदम बता रही है। लेकिन सोशल मीडिया पर ई-20 पेट्रोल को पुरानी गाड़ियों के लिए परेशानी भरा बताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि 2023 से पहले की गाड़ियां इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए यह बदलाव परेशानियां भी ला सकता है।

    2023 के वाहन ई-20 पेट्रोल के लिए उपयुक्त

    इस पेट्रोल से नफा-नुकसान को लेकर कोई ठोस जानकारी किसी को पास नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2023 के बाद निर्मित वाहन तो ई-20 कम्पेटिबल हैं, लेकिन पुरानी गाड़ियों पर असर के लिए इंतजार करना होगा, हालांकि उनका यह भी कहना है कि छोटे-मोटे बदलाव से संभावित परेशानियों से बचा जा सकता है।पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, भारत में ई-20 पेट्रोल के पूर्ण रूप से लागू होने पर हर साल 43,000 करोड़ (लगभग 4.9 बिलियन डॉलर) की विदेशी मुद्रा की बचत हो सकेगी।

    किस देश में कितना मिलाया जाता है इथेनॉल

    • ब्राजील : 30 प्रतिशत
    • अमेरिका-10 प्रतिशत
    • चीन-10 प्रतिशत
    • जापान- 10 प्रतिशत
    • यूरोपियन यूनियन- 10
    • इंडोनेशिया-10
    • थाइलैंड -20

    यह हो सकता है असर 

    • माइलेज में 2 से 5 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।
    • पुराने रबर और प्लास्टिक पार्ट्स जल्दी खराब हो सकते हैं।
    • फ्यूल टैंक में नमी और पानी बनने का खतरा।
    • लंबे समय में जंग लगने की संभावना बढ़ सकती है।
    • इंजन स्टार्टिंग में हल्की दिक्कत आ सकती है।

    नुकसान से बचने के तरीके 

    • ई -20 कम्पैटिबल रबर पाइप और पार्ट्स लगवाएं
    • गाड़ी में फ्यूल स्टेबलाइजर का इस्तेमाल करें
    • फ्यूल फिल्टर समय से पहले बदलें, ताकि दिक्कत न हो
    • वाहन के फ्यूल टैंक को पूरी तरह खाली न होने दें
    • गाड़ी को नियमित चलाते रहें
    • एंटी-कोरोजन ट्रीटमेंट कराएं
    • समय-समय पर सर्विसिंग कराएं

    एक्सपर्ट व्यू : बीएस-6 और फेज-2 गाड़ियां सक्षम

    मैकेनिकल इंजीनियर सुनील विश्वकर्मा बताते हैं कि अप्रैल 2023 के बाद बनी बीएस-6 फेज-2 गाड़ियां ई-20 पेट्रोल के हिसाब से डिजाइन की गई हैं। कार कंपनी 2016 से ही ई-20 कम्पेटिबल इंजन डिजाइन कर रही हैं। लेकिन 2023 से पहले बनी गाड़ियों के लिए स्थिति अलग हो सकती है।

    अभी तुरंत कोई नुकसान नहीं होगा

    अभी तात्कालिक रूप से कोई नुकसान होगा, यह कहना सही नहीं है। हो सकता है कि पुरानी गाड़ियों के परफॉरमेंस में कोई अंतर हो, लेकिन यह इतना ज्यादा नहीं होगा।  
    डॉ. आरके मंडलोई, रिटायर्ड एचओडी मेकेनिकल, मैनिट

    शहर के कई पंपों पर सप्लाई

    शहर में कई पंपों पर दो माह से ई -20 पेट्रोल मिल रहा है। हालांकि जिन पंपों को रिलायंस भोपाल के डिपो से पेट्रोल सप्लाई होता है, वहां जल्द पहुंचेगा।

    अजय सिंह, अध्यक्ष, पेट्रोल पंप एसोसिएशन

    पर्यावरण के लिए फायदेमंद है इथेनॉल 

    इसके अलावा, एथेनॉल एक ग्रीन फ्यूल है, जो कार्बन उत्सर्जन को कम करता है। इससे पर्यावरण को फायदा मिलता है। साथ ही गन्ने और मक्का जैसी फसलों की मांग बढ़ने से किसानों की आय में भी वृद्धि होती है।

    गाड़ियों में लीकेज और पावर का ध्यान 

    होन्डा इंडिया के वर्कशॉप मैनेजर  बताते हैं कि पुरानी गाड़ियों में इसके असर को लेकर सटीक दावे नहीं किए जा सकते। कुछ दिनों के उपयोग के बाद इसका असर समझ आएगा। मेरे हिसाब से बदलाव का असर माइलेज पर होता है। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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