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Vijay Singh Gond Death :सपा विधायक विजय सिंह गोंड का निधन, आदिवासी राजनीति के ‘पितामह’ को अंतिम विदाई

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दुद्धी से आठ बार विधायक रहे विजय सिंह गोंड का लखनऊ के एसजीपीजीआई में इलाज के दौरान निधन हो गया। दोनों किडनी खराब होने से वे लंबे समय से बीमार थे। आदिवासी समाज की आवाज बुलंद करने वाले गोंड के निधन से सोनभद्र समेत पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।
सपा विधायक विजय सिंह गोंड का निधन, आदिवासी राजनीति के ‘पितामह’ को अंतिम विदाई
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दुद्धी से विधायक विजय सिंह गोंड का इलाज के दौरान लखनऊ के एसजीपीजीआई में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। दोनों किडनी खराब होने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके निधन की पुष्टि विधानसभा अध्यक्ष अवध नारायण यादव ने की है।

    लंबे समय से चल रहा था इलाज

    परिजनों के अनुसार, विजय सिंह गोंड की तबीयत काफी समय से खराब थी। डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था, लेकिन हालत में सुधार नहीं हो सका। उनके निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में शोक की लहर फैल गई।

    आदिवासी राजनीति के ‘पितामह’ माने जाते थे

    प्रदेश की 403वीं विधानसभा सीट दुद्धी से जुड़े विजय सिंह गोंड को आदिवासी राजनीति का ‘पितामह’ कहा जाता था। उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में आदिवासी समाज की आवाज को मजबूती से उठाया। उनके निधन से सोनभद्र जिले और आसपास के इलाकों में गहरा शोक है।

    कांग्रेस से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

    विजय सिंह गोंड ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत वनवासी सेवा आश्रम से की थी, जहां वे मात्र 200 रुपये मासिक मानदेय पर काम करते थे। वर्ष 1979 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव जीता। इसके बाद वे लगातार सक्रिय राजनीति में बने रहे।

    अनुसूचित जनजाति सीट के लिए लड़ी ऐतिहासिक लड़ाई

    दुद्धी और ओबरा विधानसभा सीट को अनुसूचित जनजाति घोषित कराने के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट तक संघर्ष किया। यह लड़ाई आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए एक ऐतिहासिक कदम मानी जाती है।

    8 बार रहे विधायक, सदन में उठाई आदिवासी आवाज

    1989 में उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु रामप्यारे पनिका को हराकर आदिवासी राजनीति में नया अध्याय लिखा। अलग-अलग दलों से चुनाव जीतते हुए वे कुल आठ बार विधानसभा सदस्य रहे। सदन में उन्होंने आदिवासी समाज के अधिकार, जमीन और सम्मान से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया।

    अपूरणीय क्षति मान रहे नेता और समर्थक

    विजय सिंह गोंड के निधन को राजनीतिक, सामाजिक और आदिवासी समाज के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। नेता, कार्यकर्ता और समर्थक उन्हें एक संघर्षशील नेता और समाज के सच्चे प्रतिनिधि के रूप में याद कर रहे हैं।

    Shivani Gupta
    By Shivani Gupta

    शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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