इंदौर। शहर में लोहे और स्क्रैप के कारोबार की आड़ में करीब 100 करोड़ रुपये के फर्जी बिलों के बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) की टीम पिछले पांच दिनों से गुप्त रूप से मामले की जांच कर रही है। गुरुवार को भी कई व्यापारियों को पूछताछ के लिए डीजीजीआई कार्यालय बुलाया गया, जिससे व्यापारिक जगत में हड़कंप मच गया। जांच में इंदौर लोहा व्यापारी एसोसिएशन से जुड़े कुछ पदाधिकारी भी रडार पर आए हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक कई व्यापारी एक स्क्रैप कारोबारी को वास्तविक माल देने के बजाय केवल बिल बेच रहे थे। रिकॉर्ड में कारोबार दर्शाने के लिए फर्जी ई-वे बिल भी तैयार किए जाते थे।
डीजीजीआई इंदौर के डिप्टी डायरेक्टर धीरज मोरे के नेतृत्व में कार्रवाई शुरू की गई। टीम ने सखी स्क्रैप, वंश स्टील और पीथमपुर के कुछ स्क्रैप कारोबारियों के यहां छापे मारे। यहां से कच्चे हिसाब-किताब वाली डायरी और पर्चियां बरामद हुईं, जिनमें इंदौर के कई व्यापारियों के नाम दर्ज पाए गए। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि स्क्रैप कारोबारी 5 से 6 प्रतिशत कमीशन देकर विभिन्न व्यापारियों से फर्जी बिल खरीदते थे। इसके जरिए बड़ी मात्रा में फर्जी कारोबार दर्शाकर जीएसटी प्रणाली को नुकसान पहुंचाया जा रहा था।
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ लोहा व्यापारी गेल्वेनाइज्ड आयरन शीट (जीआई) का असली माल बिना बिल के बेच देते थे। बाद में उसी के बदले स्क्रैप के फर्जी बिल जारी कर दिए जाते थे। इससे व्यापारियों को टैक्स से बचने का रास्ता मिल जाता था। डीजीजीआई के अधीक्षक नितिन कुमार ने व्यापारियों और उनसे जुड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट के यहां भी दस्तावेज जब्त किए हैं। अधिकारियों को आशंका है कि इस नेटवर्क में कई अन्य फर्में और लोग भी शामिल हो सकते हैं।
पूरे घोटाले का मुख्य सूत्रधार एक स्क्रैप कारोबारी को माना जा रहा है। आरोप है कि वह बिना बिल का कबाड़ खरीदकर अलग-अलग व्यापारियों से सिर्फ बिल खरीदता था। इसके लिए उन्हें 5–6 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था। जांच में नजमुद्दीन नाम के एक अकाउंटेंट की भूमिका भी सामने आई है, जो स्क्रैप फर्म और कई लोहा व्यापारियों के खातों का हिसाब-किताब संभालता था। अधिकारियों के मुताबिक वह इस पूरे नेटवर्क की कड़ी के रूप में काम कर रहा था।
डीजीजीआई ने स्नेहलतागंज स्थित संदीप एंटरप्राइजेस के संदीप तुरखिया, लसूडिया स्थित एनआरके स्टील के निमेष कोठारी, पालदा के विवेक स्टील, लोहा मंडी के मुफद्दल स्टील, प्रेम गुप्ता, सेठिया सेल्स, विपुल पारिख और श्री पद्मावती स्टील से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए हैं। साथ ही पीथमपुर की आयरन मिलों से संबंधित रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आए हैं। पूछताछ के दौरान एनआरके स्टील के निमेष कोठारी, जो इंदौर लोहा व्यापारी एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष भी हैं, ने मामले की जानकारी होने से इनकार किया। वहीं स्क्रैप कारोबारी प्रेम गुप्ता ने कहा कि अधिकारियों को मांगे गए सभी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए हैं।