Dreambeans :अब बेवजह घंटों स्क्रॉलिंग नहीं, आपकी पसंद के हिसाब से हर सुबह खास जानकारी देगा नया AI ऐप

नई दिल्ली। मोबाइल हाथ में आते ही सोशल मीडिया, वीडियो और खबरों की दुनिया में खो जाना आज आम बात हो गई है। कई लोग बिना किसी खास मकसद के घंटों तक स्क्रीन पर स्क्रॉल करते रहते हैं। इसी आदत को कम करने के लिए टेक कंपनी गूगल ने एक नया AI आधारित ऐप पेश किया है, जिसका नाम "ड्रीमबीन्स" रखा गया है। यह ऐप यूजर्स को दिनभर अनगिनत पोस्ट और वीडियो दिखाने के बजाय सीमित संख्या में ऐसी जानकारियां और सुझाव देगा, जो उनकी रुचि और जरूरतों से सीधे जुड़े होंगे। गूगल का कहना है कि ड्रीमबीन्स का मकसद लोगों को ज्यादा समय तक स्क्रीन से चिपकाए रखना नहीं, बल्कि उन्हें जरूरी और उपयोगी जानकारी तक आसानी से पहुंचाना है। यही वजह है कि यह ऐप हर दिन केवल 10 से 14 पर्सनलाइज्ड स्टोरीज ही दिखाता है।
क्या है ड्रीमबीन्स और कैसे करता है काम?
ड्रीमबीन्स गूगल लैब्स का एक नया प्रयोगात्मक प्रोजेक्ट है। गूगल लैब्स वह प्लेटफॉर्म है जहां कंपनी भविष्य की नई तकनीकों और AI आधारित उत्पादों पर काम करती है। यह ऐप यूजर के गूगल अकाउंट से जुड़ी कई अलग अलग सेवाओं की जानकारी को समझकर उसके लिए खास स्टोरीज तैयार करता है। इनमें घूमने की जगहें, नई गतिविधियां, आने वाले कार्यक्रम, यात्रा से जुड़ी जानकारी, पसंदीदा विषय और यूजर की रुचि के मुताबिक खबरें शामिल हो सकती हैं। इन स्टोरीज को और आकर्षक बनाने के लिए AI से तैयार किए गए चित्र और एनिमेशन भी जोड़े जाते हैं। इससे यूजर को सिर्फ जानकारी ही नहीं बल्कि एक अलग विजुअल अनुभव भी मिलता है।
आखिर क्यों बनाया गया यह ऐप?
हाल के वर्षों में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया की लत को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ी है। खासकर लगातार नकारात्मक खबरें और कंटेंट देखने की आदत लोगों की मानसिक सेहत पर असर डाल रही है। इसी समस्या को देखते हुए ड्रीमबीन्स तैयार किया गया है। गूगल ने अपने आधिकारिक ब्लॉग में कहा है कि यह ऐप अंतहीन स्क्रॉलिंग के लिए नहीं बनाया गया है। कंपनी के अनुसार यह चुनिंदा स्टोरीज का एक सीमित संग्रह है, जिसका उद्देश्य नए विचार देना और लोगों को उन चीजों पर ध्यान लगाने में मदद करना है जो उनके लिए वास्तव में जरूरी हैं।
एक छोटे से आइडिया से शुरू हुई ड्रीमबीन्स की कहानी
गूगल लैब्स के उपाध्यक्ष जोश वुडवर्ड ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की शुरुआत एक छोटे से विचार के रूप में हुई थी। उन्होंने कहा कि हमारी टीम ऐसा ऐप बनाना चाहती थी जो लोगों को जरूरी चीजों से जोड़े, न कि उन्हें बिना वजह स्क्रॉलिंग में उलझाए रखे। हमारी सोच थी कि लोगों को डूम स्क्रॉलिंग नहीं, बल्कि होप स्क्रॉलिंग का अनुभव मिले।
ड्रीमबीन्स नाम क्यों रखा गया?
इस ऐप की प्रोडक्ट लीड गोजदे ओजनूर ने इसके नाम के पीछे की कहानी भी बताई है। उनके अनुसार "ड्रीम" शब्द इसलिए चुना गया क्योंकि जब यूजर सो रहा होता है, तब ऐप उसके कनेक्टेड प्लेटफॉर्म्स की जानकारी को प्रोसेस कर रहा होता है। उन्होंने कहा कि जब आप सो रहे होते हैं, तब यह सिस्टम आपके विभिन्न ऐप्स की जानकारी को समझता और व्यवस्थित करता है। वहीं "बीन्स" शब्द सुबह की ताजा कॉफी से जुड़ा है। गोजदे ओजनूर के मुताबिक, जैसे सुबह कॉफी का एक कप आपको ऊर्जा देता है, उसी तरह ड्रीमबीन्स सुबह आपके लिए प्रेरणा और उपयोगी जानकारी का एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण पैकेज लेकर आता है।
यूजर की आदतों के हिसाब से देगा सुझाव
ड्रीमबीन्स की सबसे खास बात यह है कि यह यूजर की गतिविधियों के आधार पर जानकारी तैयार करता है। मान लीजिए किसी व्यक्ति को जीमेल पर उसके पालतू कुत्ते के खाने की डिलीवरी का मैसेज मिला है। ऐसे में ऐप उसे कुत्तों की देखभाल, ट्रेनिंग या पालतू जानवरों से जुड़ी उपयोगी जानकारी दिखा सकता है। इसी तरह यदि गूगल कैलेंडर में किसी मीटिंग का शेड्यूल मौजूद है, तो ऐप उस जगह के आसपास मौजूद रेस्टोरेंट, कैफे या अन्य सुविधाओं से जुड़ी जानकारी भी सुझा सकता है। कई बार यह यूजर के घर के आसपास खुली नई कॉफी शॉप, घूमने की जगह या किसी स्थानीय कार्यक्रम की जानकारी भी दे सकता है।
AI से तैयार होंगी खास तस्वीरें और स्टोरीज
ड्रीमबीन्स में दिखाई जाने वाली हर स्टोरी के साथ एक अलग AI जनरेटेड चित्र भी होगा। ये तस्वीरें यूजर की पसंद, गतिविधियों और उसकी जीवनशैली के आधार पर तैयार की जाएंगी। यूजर किसी स्टोरी पर क्लिक करके उससे जुड़ी ज्यादा जानकारी भी ले सकता है। पसंद आने वाली स्टोरीज को सेव करने का विकल्प भी मिलेगा ताकि बाद में उन्हें दोबारा देखा जा सके। अगर किसी स्टोरी या सुझाव में गलती हो तो यूजर फीडबैक दे सकता है, जिससे भविष्य में दिखाई जाने वाली स्टोरीज और बेहतर हो सकें।
किन लोगों के लिए उपलब्ध है यह ऐप?
फिलहाल ड्रीमबीन्स केवल अमेरिका में उपलब्ध कराया गया है। इसका इस्तेमाल 18 वर्ष से ज्यादा उम्र के वे लोग कर सकते हैं जिन्होंने गूगल AI अल्ट्रा का पेड सब्सक्रिप्शन लिया हुआ है। यह ऐप एंड्रॉयड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। हालांकि अन्य लोग भी वेटिंग लिस्ट में शामिल होकर भविष्य में इसकी पहुंच मिलने का इंतजार कर सकते हैं।
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प्राइवेसी को लेकर क्या कहती है कंपनी?
डाटा सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर उठने वाले सवालों के बीच गूगल का कहना है कि ड्रीमबीन्स में मौजूद स्टोरीज केवल संबंधित यूजर ही देख सकता है। कंपनी के अनुसार यूजर जब चाहे अपना डेटा हटा सकता है और यह भी तय कर सकता है कि वह जीमेल, फोटो, यूट्यूब, कैलेंडर या सर्च हिस्ट्री जैसी किन सेवाओं को ऐप से जोड़ना चाहता है। गूगल का दावा है कि ड्रीमबीन्स में चुनी गई सेटिंग्स का असर उसकी अन्य AI सेवाओं पर नहीं पड़ेगा।












