Naresh Bhagoria
2 Jan 2026
Shivani Gupta
2 Jan 2026
भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा है कि संपूर्ण हिंदू समाज की एकजुटता अभी बाकी है। जहां भी हिंदू आबादी अथवा हिंदू होने का भाव कम हुआ आज अशांति वहीं बढ़ रही है। भाजपा को देख RSS को नहीं समझ सकते। संघ रिमोट नहीं, किसी को कंट्रोल भी नहीं करता। हिंदू पहचान हम सबको जोड़ती है। हम सबके पूर्वज समान है। देश को बड़ा बनाने का काम किसी के भरोसे नहीं छोड़ सकते। प्रतिनिधि सभा में कई फैसले होंगे।

प्रबुद्धजनों की संगोष्ठी में डॉ. भागवत ने कहा कि विरोधी भी हमारे हैं। सबकी ताकत से गोवर्धन उठेगा भगवान की अंगुली के साथ सबकी लकड़ी लगेगी। हमारे मत-पंथ, भाषा, जाति भले अलग हो लेकिन संस्कृति और धर्म एक है। संघ प्रमुख ने संघ के 100 साल की यात्रा का चुनौतियां और संकल्प सिद्धि से लेकर आगामी रोड-मैप की झलक भी दिखलाई। पंच परिवर्तन फॉर्मूला-सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व बोध और नागरिक अनुशासन भी समझाया। मंच पर अशोक पांडे, सोमकांत उमालकर और कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मंत्री, सांसद-विधायक सहित प्रबुद्धजन मौजूद थे।
डॉ. भागवत ने कहा कि सभी भारतीय भाषाएं राष्ट्रभाषाएं हैं। हमें 3 भाषाओं का ज्ञान हो। अपना भोजन, वेशभूषा, भजन और भवन भी हो। भाजपा, विश्व हिंदू परिषद अथवा विद्याभारती को देखकर संघ को नहीं समझ सकते। संघ के बारे में नैरेटिव बहुत चलते हैं। कई बार उसकी तुलना भी होती है लेकिन जो अनूठा हो, उसकी तुलना नहीं की जा सकती।
डॉ. भागवत ने कहा कि भलाई के काम करने वाला संघ अकेला नहीं। सभी मत संप्रदायों में ऐसी सज्जन शक्ति मौजूद है। इनके बीच संवाद और नेटवर्क होना चाहिए। पथ संचलन देख कर संघ को पैरा मिलिट्री फोर्स नहीं कह सकते और सेवा कार्य देख समाजसेवी मान सकते। संघ को समझने के लिए उसके साथ जुड़ें और देखें।
देश में 100 करोड़ हिंदू, 6.75 लाख गांव, संघ के 1.30 लाख सेवा कार्य, 60 लाख स्वयंसेवक, 1.25 लाख गांवों में संघ की पहुंच है।
डॉ. भागवत ने चीन का उदाहरण देकर समझाया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी को चीन में एक यूनिवर्सिटी के फेस्टिवल में आग्रहपूर्वक बुलाया गया। वहां विशाल मुक्ताकाशी स्टेडियम में 10 लाख युवा मौजूद थे। विशाल स्क्रीन पर दुनिया के नक्शे पर बहुत सारे ड्रेगन उड़ते हुए दिखाए गए। यह बताया गया कि चीन ऐसा था अब हमें फिर ऐसा चीन बनाना है। नई पीढ़ी को सिखाने-समझाने का तरीका अच्छा था।