Shivani Gupta
6 Jan 2026
Manisha Dhanwani
6 Jan 2026
Garima Vishwakarma
5 Jan 2026
वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के रूस से कच्चे तेल के आयात को लेकर एक बार फिर बयान देकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। ट्रंप ने दावा किया है कि, भारत ने रूस से तेल आयात घटाने का फैसला उन्हें खुश करने के लिए लिया। उन्होंने यह भी कहा कि, अगर भारत अमेरिकी चिंताओं पर सहयोग नहीं करता, तो भारतीय आयात पर टैरिफ और बढ़ाया जा सकता है। इस बयान से भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और रूस के साथ भारत की ऊर्जा नीति पर नई बहस छिड़ गई है।
एक सार्वजनिक संबोधन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, वे मुझे खुश करना चाहते थे। प्रधानमंत्री मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं। उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं था, इसलिए मुझे खुश करना जरूरी था। हम व्यापार करते हैं और उन पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं।
ट्रंप का यह बयान सीधे तौर पर भारत-रूस तेल व्यापार और अमेरिका की नाराजगी की ओर इशारा करता है। अमेरिका लंबे समय से भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद का विरोध करता रहा है।
यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के चलते रूस ने भारत को भारी छूट पर कच्चा तेल बेचना शुरू किया। उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब 130 डॉलर प्रति बैरल थी रूस भारत को 20-25 डॉलर प्रति बैरल तक सस्ता तेल दे रहा था। इसी वजह से भारत रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बन गया था। हालांकि, अमेरिका ने इस पर आरोप लगाया कि, भारत रूसी तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन युद्ध को फंड कर रहा है।
ट्रंप प्रशासन और अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया कि, रूस तेल से होने वाली कमाई का इस्तेमाल युद्ध के लिए कर रहा है। इसी आधार पर अमेरिका ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ रूसी तेल खरीदने के कारण, 25% रेसिप्रोकल टैरिफ व्यापार संतुलन के नाम पर लगाया। इस तरह कुल 50% टैरिफ भारत पर लगाया गया, जिससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में भारी नुकसान उठाना पड़ा।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने 2021 के बाद पहली बार रूस से तेल आयात में बड़ी कटौती की है।
नवंबर: 17.7 लाख बैरल प्रति दिन
दिसंबर: करीब 12 लाख बैरल प्रति दिन
आने वाले महीनों में: 10 लाख बैरल प्रति दिन से नीचे जाने की संभावना
जनवरी के आंकड़ों में और गिरावट देखी जा सकती है, क्योंकि नवंबर 2024 से रूस की बड़ी कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हुए हैं।
अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत गिरकर करीब 63 डॉलर प्रति बैरल रह गई है। रूस ने भी पहले की 20-25 डॉलर की छूट घटाकर सिर्फ 1.5-2 डॉलर प्रति बैरल कर दी है। इतनी कम छूट में भारत को पहले जैसा आर्थिक फायदा नहीं मिल रहा। इसके अलावा, रूस से तेल लाने में शिपिंग और बीमा खर्च भी अधिक है।
भारत का झुकाव फिर मिडिल ईस्ट और अमेरिका की ओर कम होते फायदे और बढ़ती लागत के कारण भारत अब फिर से सऊदी अरब, UAE, अमेरिका जैसे स्थिर और भरोसेमंद सप्लायर्स से तेल खरीद बढ़ा रहा है। अब कीमतों में बड़ा अंतर न होने से भारत की रणनीति बदली है।
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अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने दावा किया कि, भारतीय राजदूत ने उनसे राष्ट्रपति ट्रंप से अपील करने को कहा था कि भारत पर लगाया गया टैरिफ हटाया जाए। ग्राहम के मुताबिक, राजदूत ने बताया कि भारत ने अमेरिकी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए रूस से तेल आयात में कटौती की है। इसलिए एक्स्ट्रा टैरिफ अब उचित नहीं है।
भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद सुलझाने के लिए ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है। भारत की मांग है कि, कुल 50% टैरिफ घटाकर 15% किया जाए। रूसी तेल पर लगाया गया 25% पेनाल्टी टैरिफ पूरी तरह हटाया जाए। उम्मीद जताई जा रही है कि, नए साल में इस पर कोई ठोस फैसला सामने आ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि, ट्रंप का यह बयान सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकता है। भारत जैसे बड़े खरीदार द्वारा तेल आयात घटाने से रूस की आय पर असर पड़ सकता है।
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