वॉशिंगटन डीसी। पश्चिम एशिया में हालात तेजी से गंभीर होते जा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, जिसकी समय सीमा अब खत्म होने वाली है। ट्रंप ने साफ चेतावनी दी थी कि, अगर ईरान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को तुरंत नहीं खोलता है, तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
ट्रंप ने बोला कि, अगर ईरान ने बात नहीं मानी तो उसे नर्क जैसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा। इसी बीच ट्रंप आज एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं, जिसमें ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य या आर्थिक कदमों का ऐलान किया जा सकता है। इसलिए पूरी दुनिया की नजरें अब वॉशिंगटन पर टिकी हुई हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने 4 अप्रैल को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए ईरान को 48 घंटे की मोहलत दी थी।
अल्टीमेटम से जुड़े प्रमुख बिंदु
ट्रंप ने अपने संदेश में बेहद सख्त लहजे का इस्तेमाल करते हुए कहा कि, ईरान के पास अब केवल कुछ ही घंटे बचे हैं। अगर उसने चेतावनी नहीं मानी तो अमेरिका कड़े कदम उठाएगा।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल लाइफलाइन माना जाता है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और इराक जैसे बड़े तेल उत्पादक देश इसी मार्ग से तेल निर्यात करते हैं। अगर यह मार्ग बंद होता है तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इससे दुनिया भर में तेल की कीमतों में भारी उछाल और आर्थिक संकट पैदा हो सकता है। यही कारण है कि, अमेरिका इस मार्ग को खुला रखना अपनी रणनीतिक प्राथमिकता मानता है।
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ट्रंप ने ईरान को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि, उसके पास अब ज्यादा समय नहीं है। उनका कहना है कि, हॉर्मुज जैसे महत्वपूर्ण मार्ग को बंद करना दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है। ट्रंप ने कहा कि, अगर ईरान ने यह रास्ता नहीं खोला तो उसे ऐसे परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं जिन्हें दुनिया नर्क जैसी स्थिति कहेगी। ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ गई है।
इस पूरे संकट के बीच ट्रंप आज एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ी जानकारी
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट के अनुसार प्रेस की भारी मांग के कारण इस कार्यक्रम को बड़े मंच पर आयोजित किया जा रहा है। माना जा रहा है कि, इस दौरान ट्रंप ईरान से जुड़े हालात और अमेरिकी सेना के हालिया ऑपरेशन पर बड़ा खुलासा कर सकते हैं।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का एक अहम विषय ईरान में फंसे अमेरिकी पायलट का रेस्क्यू ऑपरेशन भी है। अमेरिकी सेना ने हाल ही में एक बेहद जोखिम भरा मिशन चलाकर अपने पायलट को सुरक्षित निकाल लिया। बताया गया कि, यह पायलट एफ-15E ईगल फाइटर जेट का चालक दल का सदस्य था, जिसका विमान ईरान में मार गिराया गया था।
इजरायली मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पायलट को सिर में गंभीर चोट लगी थी और वह कुछ समय तक बेहोश रहा। जब उसे होश आया तो उसने खुद को बचाने के लिए बेहद साहसी कदम उठाए।
पायलट ने क्या किया
पकड़े जाने से बचने के लिए वह ऊंचे पहाड़ी इलाके में चढ़ गया। करीब 10 से 12 किलोमीटर पैदल चला। एक पहाड़ी दरार में छिपकर उसने अपने सटीक लोकेशन कॉर्डिनेट भेजे। इस जानकारी के आधार पर अमेरिकी सेना ने बचाव अभियान शुरू किया।
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अमेरिकी सेना ने इस मिशन को अंजाम देने के लिए बेहद सावधानी से योजना बनाई। पायलट की लोकेशन से करीब 18 किलोमीटर दूर एक खेत पर कब्जा किया गया। वहां अमेरिकी सेना ने दो विमान और छोटे हेलीकॉप्टर उतारे। हेलीकॉप्टरों ने पहाड़ों की दरार में छिपे पायलट को सुरक्षित बाहर निकाला और उसे वापस उसी खेत में ले आए। मिशन पूरा होने के बाद अमेरिकी सेना ने उन विमानों को नष्ट कर दिया जो वहां फंस गए थे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ऑपरेशन में इजरायल ने भी अहम भूमिका निभाई। इजरायल ने उस इलाके में सीधे हमला करने से परहेज किया और अमेरिकी सेना को खुफिया जानकारी दी। इसके अलावा इजरायल ने ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम को व्यस्त रखने के लिए अलग-अलग स्थानों पर हमले भी किए।
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डोनाल्ड ट्रंप ने इस मिशन को अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसी रेस्क्यू ऑपरेशनों में से एक बताया है। ट्रंप के अनुसार अमेरिकी सेना ने ईरान के दुर्गम इलाके में जाकर यह मिशन पूरा किया और घायल अधिकारी को सुरक्षित बाहर निकाला। उन्होंने कहा कि, इस ऑपरेशन में शामिल सभी सैनिकों ने असाधारण साहस और कौशल का प्रदर्शन किया।
मौजूदा हालात को देखते हुए कई विशेषज्ञ मानते हैं कि, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। अगर ट्रंप अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सैन्य कार्रवाई की घोषणा करते हैं तो यह स्थिति पूरे पश्चिम एशिया में बड़े संघर्ष का रूप ले सकती है। हालांकि, अगर ईरान बातचीत के जरिए समाधान निकालने का रास्ता चुनता है तो तनाव कम भी हो सकता है।
अब पूरी दुनिया की नजरें ट्रंप की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर हैं। संभावित विकल्पों में शामिल हो सकते हैं-
इन फैसलों से आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था दोनों प्रभावित हो सकती हैं।