Diwali 2025 :क्यों जलाते हैं दीये? रोशनी के इस पर्व की असली वजह

- हर दीपक एक संदेश देता है- अंधकार चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, एक छोटी-सी लौ भी उजाला फैला सकती है।
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क्यों जलाते हैं दीये? रोशनी के इस पर्व की असली वजह
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    धर्म डेस्क। दिवाली के दिन जब लाखों दीये एक साथ जलते हैं, तो पूरा भारत मानो रोशनी का सागर बन जाता है। घरों, गलियों और मंदिरों में जगमगाहट होती है, पर क्या आपने कभी सोचा है- हम दीये क्यों जलाते हैं?

    ये सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि एक गहरा प्रतीक है। अच्छाई की जीत, उम्मीद का प्रकाश और जीवन के अंधकार को मिटाने की भावना।

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    दीये का इतिहास और धार्मिक महत्व

    दिवाली का संबंध रामायण से जुड़ा है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान राम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में नगरवासियों ने दीप जलाए थे, जिससे पूरी अयोध्या प्रकाशमय हो उठी। तभी से यह परंपरा बनी कि अमावस्या की इस रात को हर घर में दीये जलाए जाएं- ताकि अंधकार पर प्रकाश की विजय का उत्सव मनाया जा सके।

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    समय के साथ यह परंपरा भारत के हर कोने में अलग-अलग रूपों में मनाई जाने लगी। कहीं लक्ष्मी पूजन होता है, कहीं काली पूजा, तो कहीं गोवर्धन पूजा- लेकिन हर रूप में दीपक इस त्योहार की आत्मा बन गया।

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    सिर्फ रोशनी नहीं, एक सोच

    दीया जलाना सिर्फ घर को रौशन करना नहीं, बल्कि अंतरात्मा को जागृत करना है। यह हमें सिखाता है कि जीवन में चाहे कितनी भी निराशा क्यों हो, उम्मीद की एक छोटी-सी लौ भी अंधकार मिटा सकती है। मिट्टी का साधारण दीया हमें यह भी याद दिलाता है कि विनम्रता में भी शक्ति होती है- क्योंकि उसकी रोशनी कभी शोर नहीं करती, पर हर दिशा को उजाला दे जाती है।

    Mithilesh Yadav
    By Mithilesh Yadav

    वर्तमान में पीपुल्स समाचार के डिजिटल विंग यानी 'पीपुल्स अपडेट' में बतौर सीनियर सब-एडिटर कार्यरत हूं।...Read More

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