‘दिव्यांगों से मांगें माफी...’ सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर रणवीर अलाहबादिया और समय रैना को सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांगों का मजाक बनाने के मामले में सुनवाई की। कोर्ट ने यूट्यूबर और इंफ्लूएंसर रणवीर अलाहबादिया और कॉमेडियन समय रैना को आदेश दिया कि वे वीडियो बनाकर सार्वजनिक रूप से दिव्यांगों से माफी मांगें।
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‘दिव्यांगों से मांगें माफी...’ सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर रणवीर अलाहबादिया और समय रैना को सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांगों का मजाक बनाने के मामले में सुनवाई की। कोर्ट ने यूट्यूबर और इंफ्लूएंसर रणवीर अलाहबादिया और कॉमेडियन समय रैना को आदेश दिया कि वे वीडियो बनाकर सार्वजनिक रूप से दिव्यांगों से माफी मांगें।

    कोर्ट के अहम निर्देश

    • दोनों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर माफी वाला वीडियो पोस्ट करना होगा।
    • एक एफिडेविट दाखिल करना होगा जिसमें बताया जाए कि वे दिव्यांगों के अधिकारों के बारे में जागरूकता कैसे फैलाएंगे।
    • कॉमेडी और स्पीच में किसी भी समुदाय या वर्ग की भावनाओं को ठेस न पहुंचाई जाए।
    • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (IB मंत्रालय) को सोशल मीडिया की भाषा और कंटेंट के लिए गाइडलाइन बनाने के निर्देश दिए गए।
    • गाइडलाइन बनाने में NBDSA और अन्य विशेषज्ञों से सलाह लेने को कहा गया।

    जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी

    जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हास्य जीवन का हिस्सा है, लेकिन जब किसी की भावनाओं या संवेदनशील वर्ग पर चोट होती है तो यह गलत है। इंफ्लूएंसर्स को समझना चाहिए कि यह सिर्फ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं, बल्कि व्यावसायिक अभिव्यक्ति है।

    ‘आज मामला दिव्यांगों का है, कल महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों या बच्चों का भी हो सकता है। इसका अंत कहां होगा?’

    विवाद कैसे शुरू हुआ?

    • 8 फरवरी को ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ शो के एपिसोड में रणवीर अलाहबादिया ने आपत्तिजनक कमेंट किया था।
    • इसके बाद शो और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई।
    • एनजीओ ने समय रैना पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने एक स्टैंड-अप शो में SMA (स्पाइनल मस्क्यूलर अट्रॉफी) से पीड़ित नेत्रहीन नवजात का मजाक उड़ाया।
    • रैना ने 16 करोड़ रुपये के इलाज पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।

    कोर्ट की सख्ती का संदेश साफ है – कॉमेडी और कंटेंट बनाते समय किसी की गरिमा को ठेस न पहुंचे और खासतौर पर संवेदनशील वर्गों का सम्मान जरूरी है।

    Shivani Gupta
    By Shivani Gupta

    शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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