नई दिल्ली। दिल्ली से ब्रिटेन के मैनचेस्टर जा रही इंडिगो की एक फ्लाइट को टेकऑफ के करीब सात घंटे बाद ही वापस दिल्ली लौटना पड़ा। उड़ान ने सामान्य रूप से अपनी यात्रा शुरू की थी और अरब सागर के ऊपर से उड़ान भरते हुए ओमान और यूएई की दिशा तक पहुंच गई थी। हालांकि आगे बढ़ने से पहले अचानक परिस्थितियां बदल गईं और विमान को यू-टर्न लेकर वापस लौटना पड़ा। फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट Flightradar24 के मुताबिक इंडिगो की फ्लाइट 6E33 का संचालन नॉर्स द्वारा किया जा रहा था। यह विमान इथियोपिया और इरिट्रिया की सीमा के पास पहुंचने के बाद वापस मुड़ गया और अंततः दिल्ली लौट आया।
यह विमान सोमवार तड़के दिल्ली से ब्रिटेन के शहर मैनचेस्टर के लिए रवाना हुआ था। खास बात यह थी कि 26 फरवरी के बाद यह इंडिगो की पहली दिल्ली-मैनचेस्टर फ्लाइट थी। लंबे अंतराल के बाद इस रूट पर उड़ान सेवाएं दोबारा शुरू की गई थीं। सामान्य परिस्थितियों में यह उड़ान करीब 11 घंटे में अपने गंतव्य तक पहुंचती है। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के अनुसार विमान ने पश्चिम एशिया के संवेदनशील और संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों से बचने के लिए पहले से तय सुरक्षित मार्ग का ही पालन किया था। इसके बावजूद लगभग सात घंटे की उड़ान के बाद उसे वापस लौटना पड़ा।
Flightradar24 के अनुसार विमान ने अदन की खाड़ी और अफ्रीका के कुछ हिस्सों से गुजरने वाला असामान्य दक्षिणी मार्ग अपनाया था। यह मार्ग खास तौर पर मध्य पूर्व में बढ़ते ईरान-इजरायल तनाव के कारण सक्रिय संघर्ष क्षेत्रों से बचने के लिए चुना गया था।
इंडिगो के प्रवक्ता ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि मध्य पूर्व और उसके आसपास की स्थिति लगातार बदल रही है। ऐसे में कई उड़ानों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ सकता है या उनका मार्ग बदला जा सकता है। प्रवक्ता ने कहा, पश्चिम एशिया में मौजूदा स्थिति के कारण अंतिम समय में हवाई क्षेत्र पर लगाए गए प्रतिबंधों के चलते दिल्ली से मैनचेस्टर जाने वाली हमारी फ्लाइट 6E033 को वापस अपने मूल स्थान पर लौटना पड़ा। एयरलाइन ने यह भी स्पष्ट किया कि यात्रियों, चालक दल और विमान की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
दिल्ली से मैनचेस्टर के बीच की ग्रेट-सर्कल दूरी लगभग 6,829 किलोमीटर है और सामान्य परिस्थितियों में यह उड़ान करीब 11 घंटे में पूरी हो जाती है। लेकिन मौजूदा समय में मध्य पूर्व के हालात के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के मार्ग पर बड़ा असर पड़ रहा है। दरअसल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमले के बाद क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया।