इंदौर। बहुचर्चित मामले में सजा काट रहे नारायण साई और उनकी पत्नी जानकी हरपलानी के बीच तलाक विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। बुधवार को कुटुंब न्यायालय में दोनों पक्षों के बीच तीखी अंतिम बहस हुई, जिसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान दोनों ओर से गंभीर आरोप लगाए गए—जहां नारायण साई ने पत्नी पर पैसों के लिए मामला खड़ा करने का आरोप लगाया, वहीं जानकी ने मानसिक प्रताड़ना और वैवाहिक विश्वास तोड़ने जैसे आरोपों से पलटवार किया।
साधिका से किया था गुप्त विवाह
जानकी का कहना है कि 1997 में विवाह के बाद भी नारायण साई ने बिना जानकारी दिए राजस्थान में एक साधिका से गुप्त विवाह किया और उससे संतान भी है। इसी आधार पर उन्होंने तलाक की मांग करते हुए एकमुश्त पांच करोड़ रुपये गुजारा भत्ता देने की मांग रखी है। दूसरी ओर, नारायण साई इस मांग को निराधार बताते हुए इसे आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश करार दे रहे हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में अदालत ने उन्हें प्रति माह 50 हजार रुपये भरण-पोषण देने का आदेश दिया था, लेकिन भुगतान नहीं होने से बकाया राशि 55 लाख रुपये से अधिक हो चुकी है।
दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास
यह मामला इसलिए भी सुर्खियों में है क्योंकि नारायण साई पहले से ही दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। वर्ष 2019 में सूरत की दो बहनों की शिकायत पर उसे दोषी ठहराया गया था। वहीं उसके पिता आशा राम बापू को भी 2018 में दुष्कर्म के मामले में सजा मिल चुकी है। ऐसे में पारिवारिक विवाद, आपराधिक पृष्ठभूमि और भारी भरकम गुजारा भत्ते की मांग ने इस पूरे मामले को और ज्यादा संवेदनशील और चर्चित बना दिया है। अब सभी की नजर अदालत के अंतिम फैसले पर टिकी है, जो इस लंबे विवाद का रुख तय करेगा।