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डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती :CBI को देशभर में जांच के आदेश, सभी राज्यों को सहयोग करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर कड़ा रुख दिखाते हुए CBI को पूरे देश में जांच का आदेश दिया है। ठग पुलिस या जांच एजेंसी बनकर सीनियर सिटिजन्स सहित कई लोगों से करोड़ों रुपए वसूल रहे हैं। कोर्ट ने राज्यों, बैंकों, सोशल मीडिया कंपनियों और टेलीकॉम विभाग को जांच में तुरंत सहयोग देने के निर्देश दिए हैं।
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CBI को देशभर में जांच के आदेश, सभी राज्यों को सहयोग करने का निर्देश
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल फ्रॉड मामलों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन (CBI) को देशभर में सामने आए डिजिटल अरेस्ट मामलों की पैन इंडिया जांच करने का आदेश दिया है। अदालत ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि, वे CBI को तुरंत सहयोग दें और इस जांच में कोई प्रशासनिक बाधा न आने दें।

    क्या है डिजिटल अरेस्ट? कैसे फंसाए जाते हैं लोग

    सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट स्कैम एक बेहद खतरनाक साइबर क्राइम है। इसमें ठग खुद को CBI, पुलिस, ED या किसी कोर्ट के अधिकारी बताकर वीडियो/ऑडियो कॉल करते हैं। वे पीड़ित, खासकर बुजुर्गों को डराते हैं कि वह किसी अपराध में फंस गया है और अब 'डिजिटल अरेस्ट' में है।

    ठग पीड़ित से कहते हैं कि, किसी से बात मत करो, वीडियो कॉल पर रहो, स्क्रीन शेयर करो और पैसे "जुर्माना" समझकर ट्रांसफर करो। इसी धोखे में कई लोग करोड़ों रुपये गंवा चुके हैं।

    हरियाणा के बुजुर्ग दंपति का मामला बना बिंदु

    यह कार्रवाई तब तेज हुई जब हरियाणा के अंबाला में एक बुजुर्ग दंपति से 13 दिनों में 1.05 करोड़ रुपए की ठगी हुई। ठगों ने सुप्रीम कोर्ट के जजों के फर्जी हस्ताक्षर और जांच एजेंसियों के नकली आदेश दिखाकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया। पीड़ितों ने CJI को चिट्ठी लिखी, जिसके बाद कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया।

    सुप्रीम कोर्ट बोला- यह राष्ट्रीय समस्या है

    CJI सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट एक राष्ट्रीय खतरा बन चुका है। नवंबर की पिछली सुनवाई में SC ने बताया था कि, ऐसे मामलों में अब तक ₹3,000 करोड़ की ठगी सामने आ चुकी है।

    RBI से पूछा- फर्जी खातों को AI से तुरंत ट्रैक क्यों नहीं करते?

    सुप्रीम कोर्ट ने RBI को नोटिस जारी किया और पूछा कि, धोखाधड़ी में इस्तेमाल हो रहे बैंक अकाउंट तुरंत ट्रैक क्यों नहीं होते? बैंक AI और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल क्यों नहीं कर रहे? बेंच ने कहा कि, तेज तकनीक ही तेज स्कैम को रोक सकती है।

    CBI को मिले बड़े अधिकार

    सुप्रीम कोर्ट ने कड़े निर्देश देते हुए कहा-

    सोशल मीडिया और टेक कंपनियां सहयोग करें

    Meta, Google और अन्य प्लेटफॉर्म को जरूरी डेटा CBI को देने का आदेश।

    इंटरपोल की मदद लेने की अनुमति

    अगर फ्रॉड विदेशी नेटवर्क से जुड़ा है तो CBI इंटरपोल से मिलकर कार्रवाई कर सकेगी।

    बैंक अधिकारियों की भी जांच

    CBI म्यूल अकाउंट खोलने वाले बैंक कर्मियों पर भी कार्रवाई कर सकती है। जांच भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत होगी।

    टेलिकॉम विभाग को सख्त निर्देश

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, एक व्यक्ति या संस्था को कई SIM जारी होने की अनुमति न मिले। फर्जी पहचान पर SIM जारी होने की वजह से स्कैम फल-फूल रहे हैं।

    राज्यों को आदेश- साइबर सेल मजबूत करें

    कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कहा कि, राज्य और जिला स्तर पर साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर बनाएं। CBI और लोकल पुलिस के बीच तालमेल बढ़ाएं। साइबर यूनिट्स को बेहतर संसाधन और टेक्निकल सपोर्ट दें।

    डिजिटल अरेस्ट स्कैम ऐसे पहचानें

    राज्य साइबर क्राइम (भोपाल) के AIG वैभव श्रीवास्तव के अनुसार, पुलिस कभी भी व्हाट्सऐप कॉल नहीं करती। पुलिस व्हाट्सऐप पर FIR की कॉपी नहीं भेजती। पुलिस पैसे की मांग नहीं करती। पुलिस किसी को कॉल पर बंदी नहीं बनाती। पुलिस कॉल के दौरान दूसरों से बातचीत रोकने को नहीं कहती।

    साइबर ठगी के 3 बड़े तरीके

    इन्वेस्टमेंट स्कैम

    • फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल।
    • जल्दी अमीर बनने का लालच।
    • पहले छोटे निवेश का मुनाफा दिखाकर बाद में लाखों की ठगी।
    • नेटवर्क कंबोडिया, लाओस, वियतनाम से ऑपरेट।

    डिजिटल अरेस्ट स्कैम

    • नकली कॉल।
    • फर्जी कोर्ट ऑर्डर।
    • डर और धमकी के जरिए पैसे वसूली।

    बॉस स्कैम

    • CEO/CFO बनकर कर्मचारी से संपर्क।
    • फर्जी भुगतान और गिफ्ट कार्ड के नाम पर ठगी।

    पुलिस की अपील- तुरंत रिपोर्ट करें

    दिल्ली पुलिस IFSO यूनिट के DCP विनीत कुमार ने कहा कि, जैसे ही साइबर फ्रॉड पता चले, तुरंत 1930 पर कॉल करें। जल्दी रिपोर्ट करने पर खातों को फ्रीज करवाया जा सकता है। दिल्ली पुलिस ने 24×7 हेल्पलाइन भी शुरू की है ताकि किसी भी समय शिकायत दर्ज की जा सके।

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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