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नोटिस का असर!ढाई माह में 20 परिवारों में सुलह; 14 पतियों ने वापस लिए आवेदन

भोपाल में पारिवारिक विवादों को सुलझाने में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) की पहल असर दिखा रही है। महज एक नोटिस ने कई टूटते परिवारों को फिर से जोड़ दिया।
ढाई माह में 20 परिवारों में सुलह; 14 पतियों ने वापस लिए आवेदन
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    पल्लवी वाघेला, भोपाल। शहर में पारिवारिक विवादों को सुलझाने में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) की पहल असर दिखा रही है। महज एक नोटिस ने कई टूटते परिवारों को फिर से जोड़ दिया। बीते ढाई माह में 14 पतियों ने अपने शिकायती आवेदन वापस ले लिए, जबकि 6 मामलों में पत्नियों ने भी सुलह कर केस खत्म करा दिया।

    नोटिस मिलते ही बदला माहौल

    प्राधिकरण की ओर से जैसे ही दूसरे पक्ष को नोटिस भेजा गया, कई मामलों में पति-पत्नी के बीच बातचीत शुरू हो गई। 14 मामलों में पतियों ने बताया कि नोटिस मिलते ही पत्नी घर लौट आई। 6 मामलों में पतियों ने खुद आगे बढ़कर सुलह कर ली। सभी मामलों में बिना कोर्ट जाए आपसी सहमति से विवाद खत्म हुआ।

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    काउंसलिंग से सुलझ रहे विवाद

    प्राधिकरण के अनुसार, किसी भी शिकायत पर पहले काउंसलिंग और मध्यस्थता की कोशिश की जाती है। नोटिस भेजकर दोनों पक्षों को बातचीत के लिए प्रेरित किया जाता है। इसी प्रक्रिया के चलते जनवरी से 25 फरवरी के बीच यह सकारात्मक परिणाम सामने आया है।

    महिलाएं भी आगे आईं सुलह के लिए

     इन मामलों में 5 महिलाएं नौकरीपेशा और 9 गृहिणी थीं। वहीं महिलाओं की ओर से दर्ज 6 मामलों में भी नोटिस मिलते ही पति खुद सुलह के लिए आगे आए और पत्नी को वापस घर ले गए।

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    ऐसे सुलझे कुछ मामले

    एक मामले में पत्नी अपने बीमार पिता की देखभाल के लिए मायके में रह रही थी, जिससे विवाद बढ़ गया था। नोटिस के बाद दोनों ने केयरटेकर रखकर समस्या का समाधान निकाल लिया। दूसरे मामले में संयुक्त परिवार को लेकर विवाद था, जो समाज के लोगों की मध्यस्थता से सुलझ गया। एक अन्य मामले में पति के शराब पीने की आदत को लेकर विवाद था। नोटिस मिलते ही पति ने समझौता किया और अपनी आदत सुधारने का भरोसा दिया।

    परिवार बचाने पर फोकस

    प्राधिकरण का कहना है कि पारिवारिक मामलों में पहली कोशिश यही रहती है कि रिश्ते टूटने से बचाए जाएं। अधिकारियों के मुताबिक, कई मामलों में सिर्फ नोटिस और काउंसलिंग से ही सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है, जिससे बिना कोर्ट के ही विवाद खत्म हो रहे हैं।

    Sumit  Shrivastava
    By Sumit Shrivastava

    सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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