पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा को गंभीर चुनौती दी है। DGCA की यह एडवाइजरी यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की दिशा में एक अहम कदम है। एयरलाइंस को अब अधिक सतर्क रहकर अपनी उड़ान योजनाओं को अपडेट करना होगा।
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने सभी भारतीय एयरलाइंस को मिडिल ईस्ट के 11 हाई-रिस्क एयरस्पेस से दूरी बनाने के निर्देश दिए हैं। इन क्षेत्रों में उड़ान भरने से बचने के साथ-साथ एयरलाइंस को दूसरे रास्तों का प्लान बनाने को कहा गया है। यह एडवाइजरी 28 मार्च तक प्रभावी रहेगी।
हाई-रिस्क जोन में ईरान, इजरायल, लेबनान, सऊदी अरब, बहरीन, ओमान, इराक, जॉर्डन, UAE, कतर और कुवैत शामिल हैं। इसके अलावा सीरिया और यमन के एयरस्पेस को भी असुरक्षित माना गया है। DGCA ने साफ कहा है कि इन इलाकों में सैन्य गतिविधियों के चलते नागरिक उड़ानों के लिए खतरा बढ़ गया है, और किसी भी समय हादसा हो सकता है।
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एयरलाइंस को विशेष रूप से सऊदी अरब और ओमान के ऊपर FL320 (लगभग 32 हजार फीट) से नीचे उड़ान न भरने की सलाह दी गई है। इसका उद्देश्य विमानों को संभावित हमलों और सैन्य गतिविधियों से सुरक्षित दूरी पर रखना है। साथ ही फ्लाइट क्रू को NOTAMs और एयरस्पेस प्रतिबंधों की नियमित जानकारी देने और निगरानी सिस्टम मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।