देपालपुर : प्रभारी एसडीएम के भरोसे सांवेर, देपालपुर, खुड़ैल और राऊ तहसील, किसानों के सैकड़ों मामले पेंडिंग

प्रदेश में कई बड़ी तहसीलों में प्रभारी एसडीएम के भरोसे काम हो रहा है। दरअसल, डिप्टी कलेक्टर्स के तबादले होने के बाद कई तहसील में एसडीएम के पद खाली पड़े हैं। इस वजह से वकीलों, आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही हैं।
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देपालपुर तहसील कार्यालय के मैदान में भरा पानी व कीचड़

भारत सिंह, देपालपुर (इंदौर)। मध्य प्रदेश शासन द्वारा हाल ही में डिप्टी कलेक्टरों के तबादले किए जाने के बाद इंदौर जिले की चार प्रमुख तहसीलें अब तक स्थायी एसडीएम की नियुक्ति का इंतजार कर रही हैं। देपालपुर, सांवेर, राऊ और खुड़ैल जैसी महत्वपूर्ण तहसीलों का काम फिलहाल प्रभारी अधिकारियों के भरोसे चल रहा है। बताया जा रहा है कि कई अधिकारी इंदौर कलेक्टर कार्यालय में अपनी जॉइनिंग दे चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें तहसीलों का प्रभार आवंटित नहीं किया गया है। 

बारिश में बढ़ी जिम्मेदारी, प्रभारी अधिकारियों पर अतिरिक्त बोझ 

वर्तमान में प्रदेश में मानसून सक्रिय है और कई क्षेत्रों में लगातार बारिश हो रही है। ऐसे समय में बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्रों का निरीक्षण, तालाबों की निगरानी और आपदा प्रबंधन जैसी जिम्मेदारियां एसडीएम स्तर के अधिकारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। लेकिन प्रभारी अधिकारी पहले से ही अन्य स्थानों का दायित्व संभाल रहे हैं, जिसके कारण उन्हें संबंधित तहसील मुख्यालय पहुंचने का पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि नए अधिकारियों को जल्द से जल्द क्षेत्र आवंटित किए जाने चाहिए, ताकि वे स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों को समझकर प्रभावी ढंग से काम शुरू कर सकें।

देपालपुर में किसानों की सैकड़ों फाइलें अटकीं 

देपालपुर तहसील के एसडीएम प्रदीप सोनी का 28 जून को स्थानांतरण हो गया था। उनके बाद हातोद एसडीएम विनोद राठौर को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। हालांकि दो तहसीलों की जिम्मेदारी होने के कारण उनका नियमित रूप से देपालपुर पहुंचना संभव नहीं हो पा रहा है। इससे किसानों से जुड़े सैकड़ों प्रकरण लंबित हैं। खेतों की मेड़, पानी की निकासी, रास्ते के विवाद और अपीलों सहित अनेक मामलों की सुनवाई समय पर नहीं हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इन मामलों का शीघ्र निराकरण नहीं हुआ तो किसानों के बीच विवाद और बढ़ सकते हैं।

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तहसील कार्यालय परिसर में जलभराव और बदबू बनी परेशानी 

देपालपुर तहसील परिसर की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। पूर्व एसडीएम रवि वर्मा के कार्यकाल में परिसर का कायाकल्प किया गया था, लेकिन बाद में उसकी समुचित देखरेख नहीं हो सकी। वर्तमान में पार्किंग क्षेत्र में बारिश का पानी जमा है, जो सड़ने से दुर्गंध फैला रहा है और मच्छरों के पनपने का कारण बन रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मुख्य सड़क तक एक नाली बना दी जाए तो पानी की निकासी आसानी से हो सकती है। हालांकि अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इस संबंध में प्रभारी एसडीएम विनोद राठौर और तहसीलदार संगीता गोलिया से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।

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अधिवक्ता बोले-स्थायी एसडीएम की जरूरत, तभी राहत 

पूर्व बार एसोसिएशन अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता बीआर पटेल का कहना है कि बारिश के कारण कई किसानों के खेतों में पानी भर गया है और फसलें प्रभावित हो रही हैं। ऐसे मामलों में तत्काल सुनवाई और आवश्यक आदेश के लिए एसडीएम की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि तहसीलदार के आदेशों के खिलाफ अपील एसडीएम के पास जाती है, लेकिन पूर्व एसडीएम राकेश मोहन त्रिपाठी के स्थानांतरण के बाद से कई फाइलें आगे नहीं बढ़ पाई हैं। उनके अनुसार देपालपुर जैसे बड़े कृषि क्षेत्र में प्रभारी व्यवस्था के बजाय स्थायी एसडीएम की नियुक्ति आवश्यक है।

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किसान संगठन ने भी जताई चिंता 

भारतीय किसान एवं मजदूर सेना के प्रदेश सचिव चंदन सिंह बड़वाया ने बताया कि तहसील कार्यालय में किसानों की त्रुटि सुधार, तरमीम, नामांतरण और अन्य राजस्व संबंधी कई फाइलें लंबित हैं। खेतों में पानी की निकासी, रास्तों के विवाद और अन्य राजस्व मामलों में मौके पर प्रशासनिक हस्तक्षेप जरूरी होता है। उनका कहना है कि अधिकारियों की कमी के कारण किसानों को समय पर राहत नहीं मिल पा रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि चारों तहसीलों में जल्द स्थायी एसडीएम की नियुक्ति कर लंबित मामलों का निराकरण कराया जाए।

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By Bharat Tanwar

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