Manisha Dhanwani
9 Jan 2026
Naresh Bhagoria
8 Jan 2026
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुनवाई का सिलसिला लगातार जारी है। गुरुवार को ढाई घंटे तक चलने वाली सुनवाई में कोर्ट ने कुत्तों के व्यवहार, इंसानों पर उनके हमले, शेल्टर होम, ABC नियम और बजट जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा की। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि, कुत्तों का व्यवहार इंसानों के डर पर निर्भर करता है, इसलिए आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता है।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ ने पर्सनल अनुभव के आधार पर बताया कि, कुत्ते हमेशा इंसानों के डर को पहचानते हैं। यदि कोई व्यक्ति कुत्तों से डरता है, तो उन पर हमला होने की संभावना बढ़ जाती है। जस्टिस नाथ ने मजाकिया अंदाज में कहा, अपने सिर मत हिलाइए, यह मैं व्यक्तिगत अनुभव से कह रहा हूं।
याचिकाकर्ता के वकीलों ने बताया कि, राज्यों ने जो आंकड़े प्रस्तुत किए हैं, उनमें नगर पालिकाओं के शेल्टर होम की संख्या का सही विवरण नहीं दिया गया। देश में सिर्फ 5 सरकारी शेल्टर हैं और प्रत्येक शेल्टर में केवल 100 कुत्ते ही रह सकते हैं।
एनिमल वेलफेयर एक्टिविस्ट, NGO वकील और डॉग लवर्स ने कई मुद्दे उठाए-
चूहों और बंदरों का खतरा: एडवोकेट सीयू सिंह ने कहा कि अगर कुत्तों को अचानक हटाया गया, तो चूहों और बंदरों की संख्या बढ़ जाएगी।
शेल्टर होम और बजट: वकील कृष्णन वेणुगोपाल ने बताया कि आवारा कुत्तों के लिए 91,800 नए शेल्टर बनाने के लिए 26,800 करोड़ रुपए की आवश्यकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह बजट इंसानों के लिए घर बनाने में नहीं लगाया जाना चाहिए।
ABC नियम और नसबंदी: वकीलों ने कहा कि कुत्तों को पकड़कर नसबंदी और टीकाकरण करने के बाद ही उन्हें शेल्टर या वापस छोड़ना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया कि, आदेश सिर्फ संस्थानों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे रिहायशी इलाकों और स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक क्षेत्रों तक लागू करना आवश्यक है।
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सुप्रीम कोर्ट में पेश एडवोकेट नकुल दीवान ने कहा कि, कुत्तों को पकड़ने के बाद माइक्रो-चिपिंग की जानी चाहिए। माइक्रो-चिपिंग की प्रक्रिया में कुत्ते के शरीर में एक छोटी इलेक्ट्रॉनिक चिप लगाई जाती है, जिससे उनकी पहचान, वैक्सीनेशन और नसबंदी का रिकॉर्ड रखा जा सकता है।
वकील ने कहा कि, कुत्तों का स्वभाव अलग-अलग होता है, इसलिए उन्हें उसी इलाके में वापस छोड़ा जाना चाहिए जहां से उन्हें पकड़ा गया था। इससे न केवल उनकी संख्या नियंत्रित होगी, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान हल्के अंदाज में कई टिप्पणियां भी कीं-
आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अब तक कई बार आदेश दिए हैं-
28 जुलाई 2025: दिल्ली में आवारा कुत्तों के काटने और रैबीज से मौतों के मामलों पर नोटिस।
11-14 अगस्त 2025: स्कूल, अस्पताल और बस स्टैंड सहित आवासीय क्षेत्रों से कुत्तों को शेल्टर में भेजने का आदेश।
22 अगस्त 2025: नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को वापस उनके इलाके में छोड़ना।
27 अक्टूबर 2025: राज्यों को चेतावनी कि कुत्तों के काटने की घटनाओं से देश की छवि प्रभावित हो रही है।
7 नवंबर 2025: शैक्षणिक संस्थान, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश।
सुप्रीम कोर्ट ने 9 जनवरी 2026 को लगातार तीसरे दिन सुनवाई तय की है। इस दिन वकीलों को टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित लद्दाख के आवारा कुत्तों पर आर्टिकल 'On the roof of the world, feral dogs hunt down Ladakh's rare species' पढ़कर आने को कहा गया है।
आर्टिकल में बताया गया है कि, लद्दाख में जंगली कुत्तों की संख्या बढ़ती जा रही है, जो ऊंचे और संवेदनशील इकोसिस्टम में जंगली जानवरों का शिकार कर रहे हैं। कोर्ट इस आर्टिकल के आधार पर आगे की बहस और आदेश जारी कर सकता है।
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