दिल्ली मालवीय नगर अग्निकांड :21 लोगों की मौत...11 विदेशी शामिल, होटल मालिक गिरफ्तार; 6 कमरों की मंजूरी में बना दिए 25 कमरे

नई दिल्ली। दिल्ली के मालवीय नगर में बुधवार सुबह हुआ अग्निकांड राजधानी के सबसे दर्दनाक हादसों में शामिल हो गया है। हौजरानी इलाके में स्थित फ्लोरिश स्टे होटल और उससे जुड़े रेस्टोरेंट में लगी आग ने देखते ही देखते 21 लोगों की जान ले ली, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद जांच में जो खुलासे सामने आए हैं, उन्होंने होटल संचालन और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिल्ली पुलिस ने मामले में होटल मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ गैर इरादतन हत्या सहित कई धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने पहले उसके और उसकी पत्नी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) भी जारी किया था ताकि वे देश छोड़कर फरार न हो सकें।
कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 8:40 बजे होटल के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित स्नैक एंड बाइट्स रेस्टोरेंट में आग लगी। कुछ ही मिनटों में धुआं पूरे भवन में फैल गया और आग ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गई। उस समय होटल में करीब 60 लोग मौजूद थे। कई लोग सो रहे थे, जबकि कुछ मरीजों के परिजन आसपास के अस्पतालों में भर्ती रिश्तेदारों की देखभाल के लिए यहां ठहरे हुए थे। धुएं और आग की वजह से होटल में अफरा-तफरी मच गई। लोगों को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला और कई लोग खिड़कियों तथा बालकनियों से लटककर मदद मांगते दिखाई दिए।
11 विदेशी और 10 भारतीय नागरिकों की मौत
हादसे में मरने वालों की संख्या 21 पहुंच चुकी है। मृतकों में 11 विदेशी नागरिक और 10 भारतीय शामिल हैं। विदेशी नागरिकों में अफ्रीकी देशों के नागरिकों के साथ तुर्कमेनिस्तान के नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। कई शव बुरी तरह झुलस गए हैं, जिसके चलते उनकी पहचान के लिए डीएनए जांच कराई जाएगी। घायलों में भी बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है। कई मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।
6 कमरों की जगह बना दिए 25 से ज्यादा कमरे
जांच में सामने आया है कि, होटल को केवल 6 कमरों के संचालन की अनुमति मिली थी, लेकिन भवन में अवैध रूप से 25 से ज्यादा कमरे बना दिए गए थे। होटल के पास वैध फायर एनओसी (No Objection Certificate) भी नहीं थी। इसके अलावा इमारत का स्वीकृत नक्शा भी नहीं मिला है। अधिकारियों का कहना है कि, अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने इस हादसे को और भयावह बना दिया।
ये 5 बड़ी लापरवाहियां बनीं मौत की वजह
प्रारंभिक जांच में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं।
1. सिर्फ एक एंट्री और एग्जिट
पांच मंजिला इमारत में अंदर आने और बाहर निकलने का केवल एक ही रास्ता था। आपातकालीन निकास (Fire Exit) की कोई व्यवस्था नहीं थी।
2. बंद खिड़कियां और वेंटिलेशन की कमी
भवन की अधिकांश खिड़कियां सील थीं। धुआं बाहर निकलने की जगह पूरे होटल में फैल गया, जिससे लोग बेहोश होने लगे।
3. सेंसर वाला मुख्य गेट
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के दौरान सेंसर आधारित मुख्य गेट बंद हो गया था। इससे कई लोग बाहर नहीं निकल सके।
4. फायर सेफ्टी सिस्टम फेल
स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम जैसे जरूरी सुरक्षा उपकरण या तो मौजूद नहीं थे या काम नहीं कर रहे थे।
5. एलपीजी सिलेंडरों का खतरा
ग्राउंड फ्लोर पर बड़ी संख्या में एलपीजी सिलेंडर रखे गए थे। इनके लिए कोई अलग सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी, जिससे स्थिति और खतरनाक हो गई।
बेसमेंट में फंसे लोगों को ग्रिल काटकर निकाला गया
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती बेसमेंट में फंसे लोगों को बाहर निकालना था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बेसमेंट के निकास पर लोहे की ग्रिल लगी थी और उसमें ताला लगा हुआ था। दमकल कर्मियों को ग्रिल काटने में काफी समय लगा। इसके बाद लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। फायर ब्रिगेड, पुलिस और स्थानीय लोगों ने मिलकर दर्जनों लोगों को बचाया।
स्थानीय लोगों ने दिखाई इंसानियत
हादसे के दौरान स्थानीय निवासियों ने बहादुरी और मानवता की मिसाल पेश की। होटल के सामने कंबल और गद्दे की दुकान चलाने वाले अरमान ने अपनी दुकान से नए गद्दे और रजाइयां निकालकर सड़क पर बिछा दीं। ऊपरी मंजिलों से कूदने वाले कई लोग इन्हीं गद्दों पर गिरे, जिससे उनकी जान बच सकी। स्थानीय युवकों ने फंसे लोगों को निकालने और कई लोगों को सीपीआर देने में मदद की।
परिवार खत्म हो गए, पहचानना भी मुश्किल
हादसे ने कई परिवारों को पूरी तरह तबाह कर दिया। गुरुग्राम के चार्टर्ड अकाउंटेंट विवेक अग्रवाल अपने अस्पताल में भर्ती पिता का हालचाल जानने दिल्ली आए थे। होटल में ठहरे उनके परिवार के आठ सदस्यों की मौत हो गई। वहीं अजमेर के कारोबारी अशोक पंसारी, उनकी बुआ और फूफा भी इस हादसे का शिकार बने। साकेत स्थित अस्पतालों में परिजन अपने प्रियजनों की तलाश में रोते-बिलखते नजर आए। कई शव इतने बुरी तरह झुलस गए कि उनकी पहचान तस्वीरों से भी संभव नहीं हो पा रही है।
होटल मालिक ने क्या कहा?
गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में लवकेश बजाज ने दावा किया कि वह खुद होटल का दैनिक संचालन नहीं देखता था। उसने बताया कि मैनेजमेंट, अकाउंट्स और बिलिंग का काम दूसरे लोगों को सौंप रखा था। उसने यह भी कहा कि कमरों का विस्तार और अन्य बदलाव विशेषज्ञों की सलाह पर किए गए थे और उसे किसी बड़े हादसे की आशंका नहीं थी। हालांकि जांच एजेंसियां उसके दावों की सत्यता की जांच कर रही हैं।
दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि हादसे के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं दिल्ली के उपराज्यपाल ने आपात समीक्षा बैठक के बाद राजधानी में एक महीने का विशेष फायर सेफ्टी अभियान चलाने का निर्देश दिया है। इस अभियान के तहत होटल, गेस्ट हाउस, नर्सिंग होम, कोचिंग सेंटर और अन्य संवेदनशील इमारतों की जांच की जाएगी। नियमों का उल्लंघन मिलने पर सीलिंग सहित सख्त कार्रवाई होगी।
हाईकोर्ट ने 5 महीने पहले ही जताई थी चिंता
दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल एक जनहित याचिका में दावा किया गया था कि राजधानी के करीब 1000 लाइसेंसी होटल और गेस्ट हाउस में से केवल 52 के पास वैध फायर एनओसी है। जनवरी 2026 में हाईकोर्ट ने सरकार और संबंधित एजेंसियों को फायर सेफ्टी पर कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया था। लेकिन पांच महीने बाद ही यह बड़ा हादसा हो गया।











