नई दिल्ली। दिल्ली शराब घोटाला मामले में सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। इस दौरान अरविंद केजरीवाल खुद कोर्ट में पेश होकर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से इस केस से अलग (रिक्यूज) होने की मांग करेंगे। खास बात यह है कि केजरीवाल अपनी दलीलें खुद ही अदालत के सामने रखेंगे।
इस मामले में 6 अप्रैल को हुई पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने CBI को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि यदि कोई पक्ष जज को मामले से हटाने की मांग करना चाहता है, तो वह अर्जी दाखिल कर सकता है। उसी क्रम में अब केजरीवाल जस्टिस शर्मा के रिक्यूजल की मांग कर रहे हैं।
CBI ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य 22 आरोपियों को बरी कर दिया गया था। एजेंसी का कहना है कि ट्रायल कोर्ट ने तथ्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया और फैसले में कई खामियां हैं।
इससे पहले CBI ने हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर केजरीवाल की याचिकाओं का विरोध किया था। एजेंसी ने कहा कि ‘अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद’ के एक सेमिनार में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की मौजूदगी का मतलब यह नहीं है कि उनका झुकाव किसी विशेष संगठन की ओर है। इसलिए जज को हटाने की मांग का कोई आधार नहीं बनता।
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27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में केजरीवाल समेत सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने अपने फैसले में CBI की जांच पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कई सवाल उठाए थे। हालांकि, बाद में हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा ने कहा था कि पहली नजर में ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां सही नहीं लगती और इस पर विस्तार से विचार जरूरी है।
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दिल्ली सरकार ने 2021 में नई आबकारी नीति लागू की थी, जिसका उद्देश्य राजस्व बढ़ाना और शराब कारोबार में सुधार लाना था। बाद में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद इस नीति को वापस ले लिया गया। इसके बाद उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने CBI जांच के आदेश दिए।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस नीति के जरिए निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया। इस मामले में केजरीवाल को 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार किया गया था और वे 156 दिन तक हिरासत में रहे, जबकि सिसोदिया करीब 530 दिन जेल में रहे। बाद में दोनों को राहत मिली, लेकिन अब इस केस की सुनवाई एक बार फिर अहम मोड़ पर पहुंच गई है।