कच्चा तेल सस्ता, फिर भी जेब पर बोझ बरकरार!आखिर सरकार उपभोक्ताओं को राहत क्यों नहीं दे रही?

ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगातार गिरकर करीब 72 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इसमें और गिरावट संभव है। इसके बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं को एनर्जी की कीमतों में राहत मिलने के लिए अभी कुछ और इंतजार करना पड़ सकता है।
क्रूड तेली की कीमतों में लगातार गिरावट हो रही
वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड की कीमतें घटकर 72.48 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गईं, जो ईरान संघर्ष शुरू होने से पहले का स्तर माना जा रहा है। शुक्रवार को भी कीमतें करीब 72.60 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गईं। बीते महीनों में युद्ध और तनाव के कारण कच्चे तेल के बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। अब कीमतों में आई गिरावट से बाजार में राहत का माहौल बन रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट और समझौते का पड़ा असर
ईरान की कार्रवाई के दौरान होर्मुज स्ट्रेट प्रभावित होने से वैश्विक तेल सप्लाई पर दबाव बढ़ गया था और कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। इसके बाद 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर होने से हालात में सुधार आया। इसी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। बाजार विशेषज्ञ आगे भी नरमी की संभावना जता रहे हैं।
भारत में ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घटने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे पहले तेल महंगा होने पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई थी। कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में भी कटौती की थी। अब उपभोक्ता नई राहत का इंतजार कर रहे हैं।
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तेल कंपनियों के मार्जिन पर बनी नजर
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां इस समय पेट्रोल की बिक्री पर बेहतर मार्केटिंग मार्जिन हासिल कर रही हैं, जबकि डीजल की बिक्री पर अभी भी मामूली घाटा बना हुआ है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में आई हालिया गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है।












