पुरी। श्री जगन्नाथ मंदिर के खजाने की सूची बनाने का कार्य वर्ष 2026 की वार्षिक रथ यात्रा से पहले पूरा होने की संभावना है। मंदिर के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने रविवार को यह जानकारी दी। पाढ़ी ने पूर्व न्यायमूर्ति विश्वनाथ रथ की अध्यक्षता में शनिवार को हुई उच्च स्तरीय समिति की बैठक के बाद बताया कि खजाने के आभूषणों की गणना भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अधिकारियों और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की ओर से अनुमोदित जौहरियों की उपस्थिति में तीन चरणों में की जाएगी।
बैठक में मंदिर की संपत्ति की नई सूची तैयार करने के लिए रत्न भंडार उप-समिति की ओर से तैयार ग्यारह पन्नों की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) पर चर्चा की गई। प्रथम चरण में दैनिक अनुष्ठानों में उपयोग होने वाले आभूषणों की गणना की जाएगी, इसके बाद बाहरी रत्न भंडार और फिर भीतरी रत्न भंडार के आभूषणों की गणना की जाएगी। इन सभी गतिविधियों की वीडियोग्राफी की जाएगी। भीतर की रत्न भंडार की वस्तुओं की गणना के दौरान मंदिर के सेवक सदस्य, प्रबंध समिति और आरबीआई के एक अधिकारी उपस्थित रहेंगे।
सभी आभूषणों का डिजिटलीकरण किया जाएगा और नई सूची की तुलना वर्ष 1978 में बनाई गई सूची से की जाएगी। मुख्य प्रशासक ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया के दौरान श्रद्धालुओं के दर्शन में कोई बाधा नहीं आएगी। श्रद्धालु 'बाहरकाठ' से दर्शन कर सकेंगे। नई सूची का मसौदा प्रस्ताव मंदिर प्रबंध समिति के समक्ष रखा जाएगा और एसओपी सहित इसे राज्य सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। सरकार से हरी झंडी मिलते ही गणना की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। कार्य पूरा होने के बाद रत्न भंडार की चाबियां जिला कोषागार में जमा कर दी जाएंगी।
भीतर का रत्न भंडार 14 जुलाई 2024 तक बंद था। चाबियां गुम होने के कारण ताला तोड़कर इसे खोला गया था। इसके बाद पूरे खजाने को कड़ी सुरक्षा और वीडियो कैमरों की निगरानी में मंदिर के भीतर दो अस्थायी कोषागारों में इसे स्थानांतरित कर दिया गया था। खाली भंडार कक्ष मरम्मत और संरक्षण कार्य के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को सौंप दिए गए थे। भीतरी खजाने को आखिरी बार 1985 में खोला गया था। गौरतलब है कि एएसआई ने 28 अप्रैल 2025 को मरम्मत कार्य पूरा कर चाबियां मंदिर प्रशासन को सौंप दी थीं। ASI 1976 से 12वीं शताब्दी के इस मंदिर के संरक्षण का कार्य कर रहा है।