यह बजट दिल्ली के समग्र विकास की दिशा में एक संतुलित प्रयास के रूप में सामने आया है, जिसमें सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण को समान महत्व दिया गया है। सरकार का दावा है कि इन पहलों से न केवल आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि शहर की जीवन गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।
सरकार की सबसे प्रमुख घोषणा ‘महिला समृद्धि योजना’ रही, जिसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस योजना के लिए 5100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो यह दिखाता है इस बार बजट में महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कोई अस्थायी योजना नहीं है, बल्कि इसे लंबे समय तक जारी रखा जाएगा। लाभार्थियों की पारदर्शी पहचान सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष जांच समिति भी काम कर रही है।
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महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण के लिए सरकार ने 7406 करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट आवंटित किया है। इसके साथ ही एक ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च करने की तैयारी है, जिससे महिलाएं घर बैठे आवेदन कर सकेंगी। इस डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य बिचौलियों की भूमिका खत्म करना और सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में सहायता पहुंचाना है, जिससे भ्रष्टाचार रोकने में मदद मिलेगी।
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इस बार बजट का एक अहम हिस्सा इसका ‘ग्रीन बजट’ मॉडल है। कुल बजट का 21 प्रतिशत हिस्सा पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी योजनाओं के लिए निर्धारित किया गया है। सरकार का लक्ष्य दिल्ली को प्रदूषण मुक्त शहर के रूप में विकसित करना है। इसी को लेकर विधानसभा सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि हर नीति और योजना को पर्यावरणीय दृष्टिकोण से लागू किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित हो सके।