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छिंदवाड़ा: चपरासी से सालों से कराया जा रहा बाबू का काम, पदस्थापना पर उठे सवाल

छिंदवाड़ा के जनजातीय कार्य विभाग में कर्मचारियों की पदस्थापना और अटैचमेंट व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि चपरासी पद पर नियुक्त कर्मचारियों से लंबे समय से लिपिकीय काम कराया जा रहा है। इससे विभाग में नियमों के पालन और काम बांटने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
छिंदवाड़ा: चपरासी से सालों से कराया जा रहा बाबू का काम, पदस्थापना पर उठे सवाल
चपरासी से सालों से कराया जा रहा बाबू का काम

छिंदवाड़ा। मामला बिछुआ विकासखंड के संकुल केंद्र धनेगांव से जुड़े शासकीय माध्यमिक विद्यालय मुंगनापार का बताया जा रहा है। यहां भृत्य पद पर पदस्थ ज्ञानचंद बुनकर के लंबे समय से दूसरी संस्था में बाबू का काम करने का आरोप है। बताया जा रहा है कि वर्ष 2006 से वे शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धनेगांव में लिपिकीय कार्य कर रहे हैं। अब इस व्यवस्था को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और विभागीय कार्रवाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

मूल पद बाबू, लेकिन दूसरी संस्था में बाबूगिरी

बिछुआ विकासखंड के संकुल केंद्र धनेगांव अंतर्गत शासकीय माध्यमिक विद्यालय मुंगनापार में ज्ञानचंद बुनकर की मूल पदस्थापना भृत्य के पद पर बताई जा रही है। आरोप है कि वे अपनी मूलशाला में सेवाएं देने के बजाय लंबे समय से शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धनेगांव में लिपिकीय कार्य कर रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि यह व्यवस्था करीब दो दशक से चली आ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि भृत्य पद पर नियुक्त कर्मचारी को किस आदेश या व्यवस्था के तहत लगातार बाबू का काम सौंपा गया है।

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वर्ष 2006 से चल रही व्यवस्था पर सवाल

बताया जा रहा है कि ज्ञानचंद बुनकर वर्ष 2006 से धनेगांव स्थित संस्था में लिपिकीय काम कर रहे हैं। अगर यह व्यवस्था इतने लंबे समय से जारी है तो विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की नजर इस मामले पर क्यों नहीं पड़ी, यह बड़ा सवाल है। वहीं, अगर अधिकारियों को इसकी जानकारी थी तो मूल पदस्थापना पर वापस भेजने की कार्रवाई क्यों नहीं की गई। लंबे समय से चल रहे इस अटैचमेंट को लेकर अब विभागीय व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर सवाल उठने लगे हैं।

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जिला मुख्यालय में भी भृत्यों से बाबू का काम कराने का आरोप

आरोप केवल एक संस्था तक सीमित नहीं हैं। चर्चा है कि जनजातीय कार्य विभाग के जिला मुख्यालय कार्यालय सहित जिले के अन्य कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में भी भृत्य पद पर नियुक्त कर्मचारियों से लिपिकीय कार्य कराया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि विभाग में नियमित लिपिकीय कर्मचारी पदस्थ हैं तो भृत्यों को उनकी मूल जिम्मेदारी से हटाकर बाबू का काम क्यों दिया जा रहा है। इस व्यवस्था से कर्मचारियों के कार्य विभाजन और विभागीय नियमों के पालन को लेकर स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

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जांच हुई तो सामने आ सकता है पूरा मामला

इस पूरे मामले में अब मांग उठ रही है कि जिले में ऐसे सभी कर्मचारियों की पदस्थापना और अटैचमेंट की जांच कराई जाए, जो अपने मूल पद और संस्था से अलग काम कर रहे हैं। जांच में यह भी स्पष्ट किया जा सकता है कि कितने भृत्य वर्षों से कार्यालयों या स्कूलों में लिपिकीय जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। यदि नियमों के विपरीत व्यवस्था सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जरूरत होगी। फिलहाल सवाल यही है कि वर्षों से चल रही इस व्यवस्था पर विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कब तक मौन रहेंगे और क्या इस मामले में कोई ठोस कदम उठाया जाएगा।

Shyam Sahu
By Shyam Sahu

छिंदवाड़ा के वरिष्ठ पत्रकार हैं। 25 वर्षों का अनुभव अपने क्षेत्र में शासन प्रशासन की खबरें पाठकों त...Read More

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