छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 11 बच्चों की संदिग्ध मौतों का रहस्य अब खुल चुका है। जांच में सामने आया है कि बच्चों को दी गई कफ सिरप कोल्ड्रिफ (Coldrif) में खतरनाक रासायनिक तत्व डायएथिलिन ग्लायकॉल (DEG) की भारी मात्रा पाई गई थी। इसी जहरीले तत्व ने मासूमों की किडनी को फेल कर दिया, जिससे उनकी जान चली गई। अब प्रशासन ने इस गंभीर लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई करते हुए डॉक्टर और दवा कंपनी दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
डॉक्टर प्रवीण सोनी गिरफ्तार
शनिवार देर रात छिंदवाड़ा पुलिस की विशेष टीम ने परासिया के डॉक्टर प्रवीण सोनी को गिरफ्तार कर लिया। उनके खिलाफ बीएमओ डॉ. अंकित सल्लाम की शिकायत पर परासिया थाना में एफआईआर दर्ज की गई है। इसी केस में श्रेसन फार्मास्युटिकल कंपनी (कांचीपुरम, तमिलनाडु) के संचालकों पर भी कार्रवाई की गई है।
FIR में लगी धाराएं:
- बीएनएस की धारा 276: औषधियों में मिलावट (सजा - 1 वर्ष)
- बीएनएस की धारा 105(3): गैर-इरादतन मानव वध (सजा - 10 वर्ष तक)
- ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 की धारा 27(ए) (iii) और 26: मिलावटी दवा से मृत्यु (सजा - 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक)
सरकारी रिपोर्ट में पुष्टि- सिरप में 46.2% जहरीला केमिकल
- राज्य सरकार की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कोल्ड्रिफ सिरप में 46.2% डायएथिलिन ग्लायकॉल (DEG) पाया गया। वहीं तमिलनाडु की लैब रिपोर्ट में यह मात्रा 48.6% बताई गई।
- सरकारी मानक के अनुसार, सिरप में DEG की स्वीकार्य मात्रा 0.1% से अधिक नहीं होनी चाहिए। यह रासायनिक तत्व किडनी फेल, ब्रेन डैमेज और मौत का कारण बनता है।
- दो अन्य सिरप- नेक्स्ट्रो-डीएस और मेफटॉल-पी की रिपोर्ट ठीक आई है।
- अब तक 19 में से 12 दवाओं की रिपोर्ट आ चुकी है, बाकी 7 की जांच जारी है।
एक महीने में 11 मासूमों की मौत
- 32 दिनों में परासिया क्षेत्र के 11 मासूम बच्चों ने दम तोड़ दिया।
- सभी बच्चों को बुखार और सर्दी-खांसी की शिकायत पर डॉक्टर ने यही कफ सिरप लिखा था।
- इनमें 1 साल से 5 साल तक की उम्र के बच्चे शामिल थे।
मृत बच्चों की सूची
शिवम राठौड़ (4 वर्ष), विधि (3 वर्ष), अदनान खान (5 वर्ष), उसेद खान (4 वर्ष), ऋषिका पिपरे (5 वर्ष), हितांश सोनी (4 वर्ष), विकास यदुवंशी (5 वर्ष), चंचलेश (4 वर्ष), श्रेया यादव (2 वर्ष), संध्या भोसम (1 वर्ष), योगिता ठाकरे (1.5 वर्ष)।
दवा कंपनी के खिलाफ जांच तेज, उत्पादन पर रोक
- हिमाचल प्रदेश के ड्रग कंट्रोलर ने इस घटना के बाद नेक्स्ट्रो-डीएस सिरप के उत्पादन पर रोक लगा दी है।
- कंपनी को अपने सभी डीलर्स को तत्काल बिक्री रोकने का आदेश दिया गया है।
- मध्यप्रदेश के इंदौर में बनी डिफ्रॉस्ट सिरप को भी बाजार से वापस बुला लिया गया है।
- राज्य सरकार ने केंद्र और संबंधित राज्यों को पत्र लिखकर सभी संदिग्ध सिरप की जांच और बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
MP में कोल्ड्रिफ और नेक्स्ट्रो-डीएस सिरप बैन
सरकार ने शनिवार को दोनों सिरप- Coldrif और Nextro-DS को पूरे मध्यप्रदेश में प्रतिबंधित कर दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, “यह बेहद दुखद घटना है। दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। इस सिरप की बिक्री पर रोक लगाई गई है और कंपनी के अन्य उत्पादों की भी जांच होगी।” उन्होंने यह भी बताया कि, राज्य स्तर पर एसआईटी (SIT) का गठन कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
विपक्ष का हमला, मुआवजे की मांग
कांग्रेस नेता कमलनाथ ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह “मानव निर्मित त्रासदी” है। उन्होंने कहा- “छिंदवाड़ा में जहरीली कफ सिरप से मासूमों की मौत दुखद और भयावह है। राज्य सरकार को हर मृतक के परिवार को 50-50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देनी चाहिए।”
उन्होंने यह भी मांग की है कि, प्रदेश में नकली और जहरीली दवाओं के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाए ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
सभी अस्पतालों में जांच के आदेश
- जिला प्रशासन ने सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को निर्देश दिया है कि संदिग्ध दवाओं का उपयोग तुरंत बंद किया जाए।
- साथ ही सभी मेडिकल स्टोर्स में स्टॉक चेकिंग शुरू हो गई है।
- स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि अगर किसी और की लापरवाही सामने आती है, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।